एक ज़माना था जब फ़िल्में ब्लैक हुआ करती थी
काले कोट में हीरो की एंट्री हुआ करती थी
हिंदी फिल्मों के उस दौर में हेरोइन जब आती थी
घाघरा चोली पहन कजरारी आँखें मटकाती थी
गाहे बगाहे वो हीरो के रस्ते में आ जाती
नाचते गाते सखियों संग हीरो से टकरा जाती
बाग़ बगीचे में आँखें यूँ चार हुआ करती थी
बॉलीवुड फ़िल्में उस दौर में ब्लैक हुआ करती थीमाँ हीरो की अक्सर ही गरीब हुआ करती थी
आस पड़ोस में कपडे सीकर गुज़र किया करती थी
एक बहन होती जो सारा दिन टहला करती थी
विलेन की नज़रों में आने के जतन किया करती थी
हीरो कहता माँ क्यों इतना काम किया करती है
माँ कहती बहु ला दे बेटा तेरी माँ की यह बिनती है
माँ की नज़र कमज़ोर होती बीमार रहा करती थी
जिस दौर में हिंदी फ़िल्में ब्लैक हुआ करती थीपेड़ के पीछे गण वाना इश्क़ विष्क और प्यार व्यार
बहन से होती छेड़छाड़ और विलेन को लगती मार
सेठ के यहाँ पर नौकरी और लाखों का गबन
माँ की सेहत और दवा बन जाती हीरो की उलझन
बहन कूद जाती कुए में और मर जाता था विलेन
धांय ढिशुम के संग पिक्चर हो जाती थी दि एन्ड
हीरो की हर जीत पे हाल में सीटी बजा करती थी
हिंदी फ़िल्में जिस दौर में ब्लैक हुआ करती थी