शर्मा जी पार्क में जावें नित जावें हैं दोड़ लगाएं
अच्छा खावें बढ़िया पहने सेहत पे यों ध्यान लगाएंएक दिनअनहोनी बीती यों सुन लीजो सब कान लगाय
गाय पार्क में घास चरत थी गार्ड रहे लाठी से भगायडर कें गइयाँ सरपट भागें शर्मा जी रहे रस्ते जाएँ
एक गाय भगी जा रई थी शर्मा जी उसे देखत जाएँलघुशंका से हो रहे पीड़ित सोचें कब हल्के हैं जाएँ
रहे किनारे हल्के है रहे ध्यान भगति गइयाँ आएंखूब बचे शर्माजी कह रहे धीरे से वे रहे मुस्काय
तभी अचानक बिजली कौंधी दुनिया तेज घुमती जायेभगति गाय की आये चपेट में शर्मा जी दिये पटक उठाय
होश किनारे लग गए भाई शर्मा जी पड़े झाड़िन में जायहे ईश्वर क्या आफत आयी, देखें तो गैया दौड़ी जाय
उठ के खड़े भये शर्मा जी सबेरे अंग थे दुरुस्त पाएशर्मा जी फिर हलके भये दुश्मन पर रहा गुस्सा आय
भृकुटि तानी नथुने फुले यों प्रतीत हो परलय आयशर्मा जी भागे गैया पीछे हाथ में डंडा लियो उठाय
आज बचेगी नाय सारी तू बिना बात थोक दियो हायगाय जिभ फेरत थी मुंह पर शर्मा जी गर्माते जांय
दूर ते फेंक मार दियो डंडा सींग देख पिचई है जांयगाय तनिक मस्ती में जो झूमी शर्मा जी डरे भागत जांय
घिग्गी ऐसी बंधी बेचारे सांस भी घर पे लयी है आयअब जब सोवेन हैं शर्माजी या लघुशंका उन्हें सताय
सपने में भी गाय दिखत है लघुशंका आपे है जायं