इससे पहले कि तुम कुछ सोचो कुछ सोचो और कुछ न बोलो
इससे पहले कि लोग कुछ बोलें उनकी बातों से बातें निकलें
बातों के तुम कुछ मायने लो और मायने तुम दिल पर ले लो
मन ही मन तुम घुटने लगो और मुझसे भी कुछ कहने से बचो
इससे पहले कि तुम हदें मेरी जानो थाह तुम्हारी मैं लेने लगूं
मेरी कमियां तुम दिल में रखो मैं तुम्हें गलत समझने लगूं
गुमसुम रहो सोचती जाओ और मैं कुछ का कुछ मतलब लूं
पशेमां दिन रात होती रहो और उलझन में भी उलझता रहूँ
इससे पहले कि देर हो जाए छोटी बातें भी मसले बनते जाएं
उन मसलों के न कुछ हल हों तुम्हारा आज मेरी कल ना हो
मेरी आँखों में तुम जानम देखो मुझे खुद का चेहरा देखने दो
कुछ हाले दिल मैं तुमसे कहूं मेरा हाथ थाम तुम भी कह दो
ताकि देर न हो…..
ooooo ……..
