भाग्यविधाता (Bhaagyvidhaata)

दिल पागल है दिल रोता है दिल में कुछ कुछ होता है
मेरे देश में अमन चैन नेता को हज़म नहीं होता है
क्योंकि इनका स्वार्थ सिद्ध झगडे दंगों में होता है
दिल पागल है दिल रोता है दिल में कुछ कुछ होता है

वोट झटकने की खातिर हमें आपस में लड़वाते हैं
जनहित के सारे मुद्दे बस कल पर टालते जाते हैं
झूठे आंसू बहाते वर्ना इनका दिल कहाँ रोता है
दिल पागल है दिल रोता है दिल में कुछ कुछ होता है

धुर्विरोधी का नाटक करते आपस में जोड़ें रिश्ते
अपने वेतन वृद्धि बिल मिलकर अनुमोदित करते
गरज नहीं इनको भारत क्यों खून के आंसू क्यों रोता है
दिल पागल है दिल रोता है दिल में कुछ कुछ होता है

जनता के पैसों के बल पर महलों में ठाठ उड़ाते
वी आई पी कहलाते चलते ट्रैफिक हैं रुकवाते
सेवक चलते गाड़ी में और मालिक रिक्शा ढोता है
दिल पागल है दिल रोता है दिल में कुछ कुछ होता है

चित भी इनकी पट भी इनकी धन भी और माल भी इनका
प्रेस, मीडिया, पर ये काबिज़ और ठेंगा बस जनता का
जनता मरती झगड़ों में और फायदा इनका होता है
दिल पागल है दिल रोता है दिल में कुछ कुछ होता है

ऐ दिल काबू रख दिल पर क्यों पागल है क्यों रोता है
भाग्यविधाता ये हैं अपने जो चाहें बस वही होता है

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