जब सिगरेट सुलगा ली (Jab Cigarette Sulga Li)

कच्ची उम्र थी मस्ती चढ़ी सर थी
दोस्त लाया था उसको भी थमा दी
उसने सिगरेट सुलगा ली

अच्छा लगा एहसास हुआ कि जैसे
सारी दुनिया कदमों पर झुका ली
उसने सिगरेट सुलगा ली

पापा मम्मी की डांट और बहन के ताने
इन सबसे उसने निजात पाली
जब सिगरेट सुलगा ली

दुनिया झुकाना सीख गया था ग़मों से
निजात पाना वो सीख गया था
हर परेशानी मुठ्ठी में दबा ली
उसने सिगरेट सुलगा ली

ज़िन्दगी ने झटके दिए रास्ते मुश्किल हुए
थक गया थपेड़े झेलते हुए
ज़माने को देकर एक गाली
उसने सिगरेट सुलगा ली

यारों ने की दगाबाज़ी प्यार में धोखेबाज़ी
पैसे की किल्लत मोहताज़ी
खुद के अधूरे सपने बीवी के रोज के
नखरे और बच्चों की बदज़ुबानी
उसने सब चिंता भस्म कर डाली
जब एक सिगरेट सुलगा ली

वक्त ने कहानी फिर दोहरा दी जब
किसी ने सिगरेट बेटे को थमा दी
वह रुका कुछ देर सोचा
फिर सिगरेट सुलगा ली

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