बाबूजी के जीवन के फलसफे अटल थे(Babuji Ke Jiwan Ke Falsafe Atal The)

यूं तो वे सीधे सज्जन और सरल थे
बाबूजी के जीवन के फलसफे अटल थे
शिक्षक थे क्लास हमारी अक्सर लगती
मुश्किल परचे की परीक्षा देनी पड़ती
सवाल ऐसे जिनके न हमारे पास हल थे
बाबूजी के जीवन के फलसफे अटल थे

प्यार उनका अनुशासन दिखावा कम था
चेहरे पर थी गंभीरता मिजाज गरम था
मूड कैसा भी हो हमें तो डरा ही देते थे
कभी तो कान के नीचे बजा भी देते थे
वो आते होश हमारे रह जाते संभल के
बाबूजी के जीवन के फलसफे अटल थे

बोझ सबका उठाया किसी पर बने नहीं
एकाकी जिए दिल के गुब्बार कहे नहीं
जीवंत थे हमें भी यही पाठ पढ़ा गए वो
खुदी को कर बुलंद जीना सिखा गए वो
स्वयं श्रम सच्चाई का वो एक संबल थे
बाबूजी के जीवन के फलसफे अटल थे

बाबूजी का जीवन बिन पढ़ी किताब है
उनके बिना नैय्या जैसे बिन पतवार है
लू भरी तपिश साया मिलेगा न कल से
वो कल आज और आने वाला कल थे

बाबूजी यूं तो सीधे सज्जन सरल थे
उनके के जीवन के फलसफे अटल थे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *