ये अदा कहाँ से लाते हो (Ye Ada Kahan Se Late Ho)

बलिहारी प्रियतम मेरे निस दिन जो गुटखा चबाते हो
मुख की शोभा रखते निर्मल घर आँगन महकाते हो

रूम फ्रेशनर एयर फ्रेशनर की आवश्यकता हमें कहाँ
मुख एक तुम्हारा काफी है महका दो अकेले सारा जहां
घर तो क्या तुम सड़क शहर की रंगत भी सजाते हो
बलिहारी प्रियतम मेरे निस दिन जो गुटखा चबाते हो

दांत भींचकर मुख सिकोड़कर बरसाया जो पानी है
यहाँ वहाँ जहाँ तहाँ देखो कहाँ तक छोड़ी निशानी है
रंगरेज़ पेंटर बाबू रंग शहर का बदले जाते हो
बलिहारी प्रियतम मेरे निस दिन जो गुटखा चबाते हो

ताली बजाते दोनों हाथ जो मसाला बीच पीसते हो
बीपी जैसी बीमारी को तुम ठेंगे पर ही रखते हो
नुस्खा अचूक यह सेहत का बच्चों से क्यों छुपाते हो
बलिहारी प्रियतम मेरे निस दिन जो गुटखा चबाते हो

दांतुन छोड़ो तुम अपनी स्माइल से मार डालो हमको
रंग बिरंगे दांत अपने खीस निपोर दिखाओ हमको
ऐसी अदा बताओ आखिर उधार कहाँ से लाते हो
बलिहारी प्रियतम मेरे निस दिन जो गुटखा चबाते हो

लम्बी पीक गर खेल होता गोल्ड ओलम्पिक ले आते
इतने अभ्यासी मेरे प्रियतम हो गए गुटखा खाते खाते
अभिमान नहीं करते हो खुद को सहज दिखलाते हो
बलिहारी प्रियतम मेरे निस दिन जो गुटखा चबाते हो

तुम पीकू प्रियतम मेरे इस शहर की शोभा है तुमसे
सड़क बाज़ारों में उकरेई अमिट छाप प्रियवर तुमसे
दुःख दर्द क्लेश परेशानी दांतों तले चबाये जाते हो
बलिहारी प्रियतम मेरे निस दिन जो गुटखा चबाते हो

बलिहारी प्रियतम मेरे निस दिन जो गुटखा चबाते हो
मुख की शोभा रखते निर्मल घर आँगन महकाते हो

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