तुम न जब संग थे
ख्वाब सब बेरंग थे
बेख़ौफ़ मगर घर जाता था मैंअब तुम जो मिले हो
इतना कुछ है खोने को
कि सिर्फ एहसास ही से डर जाता हूँ मैंराब्ता है तुमसे
कि बिन कहे एक लफ्ज़
दिल के जज़्बात समझ जाता हूँ मैं
तुम न जब संग थे
ख्वाब सब बेरंग थे
बेख़ौफ़ मगर घर जाता था मैंअब तुम जो मिले हो
इतना कुछ है खोने को
कि सिर्फ एहसास ही से डर जाता हूँ मैंराब्ता है तुमसे
कि बिन कहे एक लफ्ज़
दिल के जज़्बात समझ जाता हूँ मैं