लम्हे जो चंद मिले हैं तो खुद पर ध्यान दो चलो
कांटे हैं चुभे पैरों में ज़रा उनको निकाल चलो
सफर सिर्फ तुम्हारा है तो खुद पर ध्यान दो चलो
है लंबा सफर थका बदन सोए भी तुम कहां हो
अपनी कम थीं मुश्किलें गैरों की से परेशान हो
ना चलो तेज धूप में रुको कहीं ठंडी छांव लो
लम्हे जो चंद मिले हैं तो खुद पर ध्यान दो चलो
कांटे हैं चुभे पैरों में ज़रा उनको निकाल चलो
सफर सिर्फ तुम्हारा है तो खुद पर ध्यान दो चलो
भगदड़ मची है तुम्हें खुद को बचाना ही पड़ेगा
पैर अनजान बदहवास वरना तुमको रोंद देगा
मिज़ाज़ी शहर है अपनी पहचान कोई तो हो
लम्हे जो चंद मिले हैं तो खुद पर ध्यान दो चलो
कांटे हैं चुभे पैरों में ज़रा उनको निकाल चलो
सफर सिर्फ तुम्हारा है तो खुद पर ध्यान दो चलो
सामान भी सफर कब तुमने कितना ले रखा है
तुम्हारा तो नहीं है तो बोझ किसका ले रखा है
दे दो किसी को थोड़ा कुछ खूंटी पर टांग दो
लम्हे जो चंद मिले हैं तो खुद पर ध्यान दो चलो
कांटे हैं चुभे पैरों में ज़रा उनको निकाल चलो
सफर सिर्फ तुम्हारा है तो खुद पर ध्यान दो चलो