गोरी पियाजी के घर चली (Gori Piyaji Ke Ghar Chali)

गोरी पियाजी के घर को चली
दुनिया किसी की बसाने चली
कितनों के अरमान ढीले हुए
टुकड़े दिलों को बनाकर चली

लड़कों के दिल का तस्सवुर थी वो
सारे मोहल्ले की रौनक थी वो
आसिक सब ता ता थैया करें
ऐसी धमक बजती ढोलक थी वो
जब से सजनी का रोका हुआ
उनकी उल्फत से धोखा हुआ
बैठे हैं अब सर पटकते हुए
रहम ऐ खुदा रोक लो वो चली

गोरी पियाजी के घर को चली
दुनिया किसी की बसाने चली
कितनों के अरमान ढीले हुए
टुकड़े दिलों को बनाकर चली

जोश-ऐ-जवानी फ़ना कर गयी
रानी किसी और की हो गयी
सेविंग्स से अपनी था पाला जिसे
एफडी किसी और की बन गयी
आँखों को दिन में ही तारे दिखे
दिल बेचारा ठंडी आहें भरे
हसरत वो सारी फ़ना हो गयीं
रोजगार धंधे तबाह कर चली

गोरी पियाजी के घर को चली
दुनिया किसी की बसाने चली
कितनों के अरमान ढीले हुए
टुकड़े दिलों को बनाकर चली

सावन में जब घर आएगी वो
बच्चों से मामा कहलाएगी वो
नकारा नालायक लूज़र हो तुम
फीलिंग हर वक्त दिलाएगी वो
होली दिवाली गुजर जायेंगे
राखी भाई दूज पर छुप जायेंगे
मर जाओ सारे अरे डूबकर
आसिकों को बना उल्लू चली

गोरी पियाजी के घर को चली
दुनिया किसी की बसाने चली
कितनों के अरमान ढीले हुए
टुकड़े दिलों को बनाकर चली

छोडो किसी से क्या चर्चा करें
नाहक यूँ ही क्यों सोचा करें
दुनिया में लाखों हंसी और हैं
मिल जाते जो थोड़ा खर्चा करें
हसीना कोई और नज़र आएगी
सहनाई सादी की वो बजवाएगी
बेवफा सब इसके जैसी नहीं
आसिकों से पत्तल उठवा चली

गोरी पियाजी के घर को चली
दुनिया किसी की बसाने चली
कितनों के अरमान ढीले हुए
टुकड़े दिलों को बनाकर चली

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