ज़ख्म अभी नए हैं (Zakhm Abhi Naye Hain)

ज़ख्म अभी नए हैं घाव अभी हरे हैं
दो चार दिनों में सब हो जायेगा ठीक

कुछ तुमने कड़वा बोल दिया
कुछ मेरी जुबां से निकल गया
कोई बात नहीं है ऐसा होता है
हम जल्द फिर हो जयेन्गे नज़दीक
दो चार दिनों में सब हो जायेगा ठीक

चुप तुम हो गए हो मैं भी नहीं बोलता
रिश्ता अपना है बेजान बेमोल सा
हम दोनों चाहे नज़रें नहीं मिला रहे
रिश्ते की गहराई है दोनों के बीच
दो चार दिनों में सब हो जायेगा ठीक

जन्मों का रिश्ता है ये कहाँ टूटेगा
प्यार हम दोनों में खुद फुट पड़ेगा
हम फिर साथ बैठेंगे मुस्कुरायेंगे
चाय की चुस्की और बातचीत
दो चार दिनों में सब हो जायेगा ठीक

जानता हूँ ताली एक हाथ नहीं बजती
समझ से काम लेते तो बात न बढ़ती
खैर तुम बड़े हो तो बड़प्पन दिखाना
मेरी नादानियों पर गौर न करना
मैं भी जल्द अपने अहम को लूंगा जीत
दो चार दिनों में सब हो जायेगा ठीक

ज़ख्म अभी नए हैं घाव अभी हरे हैं
दो चार दिनों में सब हो जायेगा ठीक

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