क्यों दिल्ली दूर हो गई है (Kyon Dilli Door Ho Gayi)

एक दौर था कद्र एक दूसरे की थी
य़ारी में तेरा मेरा की गिनती नहीं थी
मैं तेरे लिए तू मेरे लिए था
य़ारी अपनी दोस्त जां से बढ़कर थी

संग संग रहना संग संग पीना खाना
बातें जो करना तो करते ही जाना
दुनिया से लड़ने की ताकत सौगुनी थी
य़ारी अपनी दोस्त पक्की इतनी थी

फिर यार मेरे ऐसी क्या बात हो गई
तहजीब तेरी कुछ बदली हुई हैँ
बेबाकपन जिस से दोनो मिलते थे
गर्मजोशी क्यों वो मजबूर हुई है
मेरे यार मुझको इतना बता दे
क्यों दिल्ली इतनी अब दूर हो गई है

गनित में तो हम दोनो कच्चे थे
फिर गिनने की आदत क्यो हो गयी है
कौन किसके यहां कितनी बार आया
कॉल किया कितना कब कब मिलाया
यकीं मान मेरा ऐ काबिल मेरे दोस्त
इन झगडों में दोस्ती चूर हो गई है
एक बार मुझको इतना बता दे
क्यों दिल्ली इतनी अब दूर हो गयी है

वक़्त का तकाज़ा या ख़ालिश दिल की
तेरी हंसी क्यों बेनूर हो गयी है
मेरे यार मुझको इतना बता दे
क्यों दिल्ली इतनी अब दूर हो गई है

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