बारिश की आमद चींटियों से पूछो
अण्डों को ले जो पलायन कर गयीं
मोरों की ख़ुशी का ठिकाना न था
गरीबों की पूरी बस्ती उजड़ गयीएक किसान की दो बेटियां थीं
बड़ी ब्याही गयी किसान के घर
और छोटी गयी कुम्हार के घर
किसान जब मिलने उनसे गया
अजब असमंजस से घिर गयाकिसान बेटी बोली सुनो बाउजी
अच्छी फसल मिले दुआ करना
सावन में बारिश आये झमाझम
बिटिया को ऐसी आशीष देनाबेटी कुम्हार बोली सुनो पिताजी
बारिश न हो यह कामना करना
मिटटी के बर्तन देते हमारी रोटी
रोटी न छिन जाए प्रार्थना करनाकिस बेटी के लिए बापू दुआ करे
बारिश हो तो छोटी का घर उजड़े
और न हो बारिश भूखी बड़ी मरे
ऐ मेरे मालिक सुन ऐ मेरे मौला
गरीब बेचारा क्या करे क्या न करेबारिश की आमद चींटियों से पूछो
अण्डों को ले जो पलायन कर गयीं
मोरों की ख़ुशी का ठिकाना न था
गरीबों की पूरी बस्ती उजड़ गयी