बुलाओगे तो क्यों न आऊंगा (Bulaaoge To Kyon Na Aaunga)

बीत गया मैं वह वक्त नहीं
जुबां से निकला शब्द नहीं
कमां से छूटा तीर भी नहीं
जो लौटकर न आ पाऊंगा
बुलाओगे तो क्यों न आऊंगा!

हर युग में मैं आया ही हूँ
सच्चे मन की पुकार पर
विपत्ति ग्रस्त संसार पर
धर्म पर हुए प्रहार पर
कैसे मौन रह पाऊंगा
बुलाओगे तो क्यों न आऊंगा!

मैंने रखा है सदा मान
द्रौपदी के क्रंदन का
मीरा के प्रणय बंधन का
विदुर के अभिनन्दन का
पुकार देखो! रह न पाऊंगा
बुलाओगे तो क्यों न आऊंगा

प्रीत को पहचानता हूँ
सर्वस्व अपना मानता हूँ
कौन मेरा! है मैं जानता हूँ
वचन निश्चय ही निभाऊंगा
बुलाकर देखो मैं आ जाऊंगा!

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