तुम्हारे तस्सव्वुर में सराबोर हो जाने की ज़िद की है
फिर एक बार रेत मुठ्ठी में दबाने की कोशिश की हैहमको मालूम है गुज़रा वक़्त लौटकर नहीं आता
मासूम की तरह चाँद छू लेने की हिमाकत की हैवफ़ा तुमने निभाई थी तो बेवफा हम भी नहीं थे
किसने फिर चमन उजाड़ने की साजिश की हैउधर तूफ़ां का कहर इधर मयखाने में डूबे हम
बेखुदी में ही तुम्हें भूल जाने की कोशिश की हैदम निकला जिस दम लबों पर नाम आ ही गया
लाख तेरे नाम पर होंठ सी लेने की कसम ली हैउमड़ आया शहर तमाम जब ज़नाज़ा निकला
तुम्हारे दीदार को आँखो ने फिर हरकत की है