मैं तो मासूम थी, नामालूम थी,
बेचारी, भूखी—मैं एक माँ थी।छल-कपट से मैं थी अनजान,
बड़े पेट की भूख से परेशान।
झूठे सत्कार पर यक़ीन किया,
जो परोसा गया, स्वीकार किया।मैं तो मासूम थी, नामालूम थी,
बेचारी, भूखी—मैं एक माँ थी।हम हैं जानवर, हम ऐसे तो हैं—
धोखे पर भी जान वार देते हैं।
आधा सच हम नहीं जानते हैं,
साँसों में ज़हर नहीं पालते हैं।मैं तो मासूम थी, नामालूम थी,
बेचारी, भूखी—मैं एक माँ थी।मेरी मौत का तमाशा बना लो,
इस लाश से भी पैसे कमा लो।
झूठे आँसू मीडिया में बहाकर,
मुद्दा बनाकर वोट हथिया लो।मैं तो मासूम थी, नामालूम थी,
बेचारी, भूखी—मैं एक माँ थी।हर मुद्दे पर शोर मचाने वाले,
विस्फोट से मुझे मारने वाले—
भूख कसूर तो, पाप न गिनूँगी,
मासूम का क़त्ल न बख़्शूँगी।मैं तो मासूम थी, नामालूम थी,
बेचारी, भूखी—मैं एक माँ थी।