सितमगर (Sitamgar)

झूठ ही सही तारीफ वो मेरी कर दिया करता था
मेरे किरदार के अच्छे दाम लगा दिया करता था

ये नज़रें तलाशती हैं अब तक उस सितमगर को
दुश्मन था फिर भी वो दिल जीत लिया करता था

मुझे बहलाने को हकीकत छुपा लिया करता था
मेरे हर सवाल का जवाब वो दे दिया करता था

जुदा हो कर भी वो ज़हन में बसा है अब तक
खो गया है जो ख़ास लोगों में हुआ करता था

मौत ने कई बार दस्तक दी थी दरवाजे पर
जख्मों को वो हंस कर पी जाया करता था

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