पतंग (Patang)

उमंग थी तरंग थी
मलंग थी मैं संग थी
जब डोर तेरे हाथ थी
मैं उड़ती पतंग थी

अब न संग तू बेरंग
सब रंग हैं मैं दंग हूँ
छूटा तेरा संग अब
मैं कटी एक पतंग हूँ

हवा से मैं हूँ हारी
बिन डोर की मैं फिरारी
कहाँ जाऊँ क्या करूँ
मायूस हूँ मैं तंग हूँ

उमंग थी तरंग थी
मलंग थी मैं संग थी
जब डोर तेरे हाथ थी
मैं उड़ती पतंग थी

अब न संग तू बेरंग
सब रंग हैं मैं दंग हूँ
छूटा तेरा संग अब
मैं कटी एक पतंग हूँ

थामने मुझे आया नहीं
तूने मुझे सँभाला नहीं
तेरे बिन ये हाल है
बेबस मैं बदरंग हूँ

उमंग थी तरंग थी
मलंग थी मैं संग थी
जब डोर तेरे हाथ थी
मैं उड़ती पतंग थी

अब न संग तू बेरंग
सब रंग हैं मैं दंग हूँ
छूटा तेरा संग अब
मैं कटी एक पतंग हूँ

तूने छुड़ाया जो हाथ
मुझे ले गया कोई साथ
तुझे याद कर के रोई
मैं क्यों न तेरे संग हूँ

उमंग थी तरंग थी
मलंग थी मैं संग थी
जब डोर तेरे हाथ थी
मैं उड़ती पतंग थी

अब न संग तू बेरंग
सब रंग हैं मैं दंग हूँ
छूटा तेरा संग अब
मैं कटी एक पतंग हूँ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *