बदलाव (Badlaav)

झुकी मूछों में ज़रा सा ताव ज़रूरी है
रिश्तों में खुलूसो खिंचाव ज़रूरी है
पत्थर बनकर मत रोको रौ दरया का
तरक्की के लिए बदलाव ज़रूरी है

पत्थरों में यूँ तो भगवान् बसा करते हैं
पत्थर अक्ल पर पड़े हों तो है तबाही
थाम कर बैठो वक्त निकल जाता है
यही पल अपना है ये भाव ज़रूरी है

ज़िन्दगी के रंग में रंग मिलाते जाओ
रुकावटों को मिलकर हटाते जाओ
हर पल में छिपी है एक नयी कहानी
कहानी कहने का अंदाज़ ज़रूरी है

सीखें नयी बातें हर रोज़ एक हम
क्या हुआ जो हैं मुश्किलें तमाम
रास्ता खुद खोज लेते हैं बढ़ते कदम
कदम आगे बढ़ाना जनाब ज़रूरी है

मूंछों के ताव में छुपा है राज़ खास
सुख-दुःख दोनों रहते हैं आसपास
लबों पर हंसी हो कोशिशें करते रहो
दुःख में मुस्कुराने का भाव ज़रूरी है

ज़िन्दगी के रंग में रंग मिलाते जाओ
रुकावटों को मिलकर हटाते जाओ
हर पल में छिपी है एक नयी कहानी
कहानी कहने का अंदाज़ ज़रूरी है

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