तुम और हम (Tum Aur Ham)

एक पुरानी तस्वीर में जकड़े तुम और हम
धुंधली सी यादों में सिमटे हैं धुंधले से हम
जब बंधन में बंधे थे तुम, कितनी नई थी
जोशे-जुनून और जवानी, हर बात नई थी

एक दूजे में आमादा होते थे तुम और हम
हर सांस में गुमशुदा, जकड़े तुम और हम

चाँदनी रातों में कसमें खाई थीं हमने
ख़्वाब गलियों में राहें बनाई थीं हमने
वक़्त के साये ने मगर रंगत चुरा ली
सुनहरी वो यादें भी अब धुंधला गईं
तूफानों ने रिश्तों को झकझोर दिया
दिल की गलियों में गहरी बनी खाई

अब तस्वीर देख कर बस मुस्काते हैं
बीते दिनों की कहानी गुनगुनाते हैं
एक पुराने लम्हे में ठहरे तुम और हम
सांसों के पन्नों में लिखे तुम और हम

एक दूजे में आमादा होते थे तुम और हम
हर सांस में गुमशुदा, जकड़े तुम और हम

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