“आठ बजे की मेट्रो प्यारे, जब जब तुझको ले जायेगी…
धिक्चिक धिक्चिक धिक्चिक धिक्चिक धिक्चिक धिक्चिक ले जायेगी…”
“मौजपुर की ओर जानेवाली गाड़ी,
प्लेटफॉर्म नंबर तीन पर आने वाली है,
कृपया पीली रेखा से पीछे रहें…”
“गाड़ी आए जब तू चढ़ जाना,
सवारियों को पहले उतरने देना,
वर्ना भगदड़ मच जायेगी…”
“आठ बजे की मेट्रो प्यारे, जब जब तुझको ले जायेगी…
धिक्चिक धिक्चिक धिक्चिक धिक्चिक धिक्चिक धिक्चिक ले जायेगी…”
“सफ़र की शुरुआत होगी,
दरवाज़े बंद हो जाएंगे…
भीड़ के बीच सुन लेना,
‘कृपया दरवाज़ों से दूर रहें…’
वर्ना गुद्दी बीच में फँस जायेगी…”
“आठ बजे की मेट्रो प्यारे, जब जब तुझको ले जायेगी…
धिक्चिक धिक्चिक धिक्चिक धिक्चिक धिक्चिक धिक्चिक ले जायेगी…”
“अगला स्टेशन डैश डैश है,
दरवाज़े बाईं तरफ खुलेंगे,
कृपया सावधानी से उतरें,
डिंगडाँग बेल बज जायेगी…”“गंतव्य स्टेशन शहीद स्थल है,
यात्रियों की धड़कनों में घुलती,
अनोखी लय, यह अनोखा राग…
याद दिल में तेरे बस जायेगी…”
“आठ बजे की मेट्रो प्यारे, जब जब तुझको ले जायेगी…
धिक्चिक धिक्चिक धिक्चिक धिक्चिक धिक्चिक धिक्चिक ले जायेगी…”
मेट्रो से अब उतर गया हूँ
पैदल अब मैं चलने लगा हूँ
मेट्रो कतय की भीड़ भाड़ में,
भीड़ में कहीं खो गया हूँ
मेट्रो वाक में देखो ज़िन्दगी
कहाँ मुझे अब ले जायेगी
धिक्चिक धिक्चिक ज़िन्दगी धक्का मुक्की में कट जायेगी
“आठ बजे की मेट्रो प्यारे, जब जब तुझको ले जायेगी…
धिक्चिक धिक्चिक धिक्चिक धिक्चिक धिक्चिक धिक्चिक ले जायेगी…”
A really good blog and me back again.