हम मैसेज कर देते हैं गोया वो पढ़ भी लेते हैं
आरज़ू है मगर आएं नज़र वो कभी टाउन में
उम्र दराज मांगकर लाये थे हम जो चार दिन
दो ब्रेकअप में गुज़र गए दो लॉकडाउन मेंवो सब बातें उनकी बीती हुई वो यादें मीठी
कभी हँसते हुए तो कभी आंसूओं में बीती
यारों ने समझाया था बेहतर है चल अकेला
पर दिल वहीं रुका है ओढ़े यादों के मेलेहम मैसेज कर देते हैं गोया वो पढ़ भी लेते हैं
आरज़ू है मगर आएं नज़र वो कभी टाउन में
उम्र दराज मांगकर लाये थे हम जो चार दिन
दो ब्रेकअप में गुज़र गए दो लॉकडाउन मेंदिल की गली में बुनते थे जो सपनों के धागे
अब सन्नाटा बस पसरा सिर्फ खामोशी जागे
सूनी रातों में जागे रहते हैं हम यादों में खोए
कभी दूरियों से डरते थे बैठे हैं तनहा अकेलेहम मैसेज कर देते हैं गोया वो पढ़ भी लेते हैं
आरज़ू है मगर आएं नज़र वो कभी टाउन में
उम्र दराज मांगकर लाये थे हम जो चार दिन
दो ब्रेकअप में गुज़र गए दो लॉकडाउन मेंअब वक़्त गुज़र जाता है फोन के हरफ़ों में
खंगालते रहते हैं मतलब पुरानी बातों में
वो तस्वीरें वो हसीन लम्हें हम भूल न पाए
यार थक गए हैं जनाब को कौन समझाएहम मैसेज कर देते हैं गोया वो पढ़ भी लेते हैं
आरज़ू है मगर आएं नज़र वो कभी टाउन में
उम्र दराज मांगकर लाये थे हम जो चार दिन
दो ब्रेकअप में गुज़र गए दो लॉकडाउन में