ज़िन्दगी की सरसराहट…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    आम आदमी के सपने (The Common Man’s Dream)

    आम आदमी के सपने: गाड़ी है बंगला है नौकर हैं चाकर हैंनहीं कोई कमी है कोई दुःख नहीं हैIजीवन में हर पल ख़ुशी ही ख़ुशी हैनहीं कोई कमी है कोई दुःख नहीं हैI घर में हम रोटी मक्खन से खाते हैंबासमती बिरियानी घर पर पकाते हैंIमन में कोई आस अब बाक़ी नहीं हैनहीं कोई कमी है कोई दुःख नहीं हैI होली दीवाली मौज़ों से मनाते हैंपब्लिक स्कूल में बच्चे अब जाते हैंIघूमने की जगह कोई बची ही नहीं हैनहीं कोई कमी है कोई दुःख नहीं हैII आम आदमी की हकीकत नींद खुलते ही मगर हकीकत अलहैदा हैबासी रोटी पर होता…

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    हमारी तारीफ़ (First Impression)

    समंदर बोतल में उतारा है हमनेबरगद गमले में उगाया है हमनेशीशे कोआईना दिखाया है हमनेहाथी से भी गन्ना छुड़ाया है हमने! तारीफ़ अपनी ज़माने से पूछो तोसूरज को शरबत पिलाया है हमने कई बार जंगल में जाकर के मित्रोन लाठी न बन्दूक थी साथ मित्रो‘बंगाल टाइगर’ हमें जब मिला हैखुदाया शहर तक भगाया है हमने तारीफ़ अपनी ज़माने से पूछो तोगीदड़ को गाँव से खदेड़ा है हमने समंदर बोतल में उतारा है हमनेबरगद गमले में उगाया है हमनेशीशे कोआईना दिखाया है हमनेहाथी से भी गन्ना छुड़ाया है हमने! तारीफ़ अपनी ज़माने से पूछो तोसूरज को शरबत पिलाया है हमने एक…

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    An ode to bachelorhood

    बड़ी मौज थी तुमसे मिलने से पहलेज़िन्दगी थी टशन तुमसे मिलने से पहले सर्दी की थी चिंता न गर्मी का डर थाबहारों का आलम हर सु साल भर थासभी पतझड़ों से ये दिल बेखबर थासावन न आता था इज़ाज़त से पहलेबड़ी मौज थी तुमसे मिलने से पहले यारों के संग रोज़ पार्टी मनानाबहाने बनाना घर भी लेट आनाबंद कमरे में लाउड म्यूजिक बजानासोते न थे पान खाने से पहलेबड़ी मौज थी तुमसे मिलने से पहले खाते थे खुद पकाते थे खुद हीपप्पू के ढाबे से लाते थे खुद हीबहुत तेज़ होती थी अक्ल हमारीहल थे सभी मुश्किलों के पहलेबड़ी मौज…

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    बचपन बुलाता है (Bachpan Bulaata Hai)

    चल समय के रथ को मोड़ लें अतीत मेंकिताबों का बस्ता और बचपन बुलाता है!रोज़ की इस भगदड़ से बच चल बैठेंपेड़ों की छाँव हवा का झोंका बुलाता है चल समय के रथ को मोड़ लें अतीत मेंकिताबों का बस्ता और बचपन बुलाता है! छूटे मकानों में जा छिप कर बैठेंनहाएं बारिशों में बूंदों को पकड़ेंआंगन में बहते हुए तेज पानी मेंकागज की कश्ती का नर्तन बुलाता है! चल समय के रथ को मोड़ लें अतीत मेंकिताबों का बस्ता और बचपन बुलाता है! बुलाते हरे खेत बुलाती वो सरसों हैगलियां बुलातीं और आँगन बुलाता है!पीतल की थाली में गुड़ संग रोटीदूध…

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    B. Tech CSE (You’re My Wi-Fi Darling)

    You’re my Wi-Fi darling You’re my Wi-Fi darling,I’m your router dear,I only connect with you —Say yes, don’t fear Say the word, I’ll rev my bike,Spin around the world for you,Measure starlight distancesBring the sun as pillion too! Dear, when you walk by,Many dudes may go all senti—But this love offer I give youComes with lifetime warranty Our techno-love will beA futuristic tale for sure,Though love’s warranty periodMight last just three years more. Here’s a mobile, sweetie pie,Chat with me for hours,Be it email, WhatsApp, Facebook,Stay synced in love’s powers. Keep your status updated,Hope no one else you like—Let’s go…

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    तेरा अक्स (Tera Aks)

    मैं खोजता रहा उसकोमंदिरों में शिवालयों मेंमस्जिदों गुरुद्वारों मेंमहसूस किया न कियाजब थामा तूने हर बारजब जब मैं गिरा भटकाजीवन की डगर परतू कहीं पास ही थासही राह दिखाने कोमेरे अंधरे मिटाने को आज जब लौ जगीजीवन की दिशा बदलीदर्पण से धुल हटीअंतर्मन जगमगायाफिर नज़र आयाकि तू ही ‘ओम’ बनकरमेरा जन्मदाता बना मेरा हाथ पकड़करछोटे क़दमों को सेचलाया बड़ा कियाउस माँ में तू ही था सखा बंधू बनकरप्रेम ‘सुधा’ से सींचकर‘राम’ का सा स्नेह दियावो ‘लक्ष्मण’ तू ही था वो जो मेरे साथ रहादुःख में सुख मेंगर्मी सर्दी मेंसावन भादों मेंसब नेक इरादों मेंन कोई शर्त न शिकायतये मैंने अब देखा…

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    रहमत (Rahmat)

    रह मत अकेला, थका हारा सा,परेशान , ठहरा सा,मायूस . उजड़ा सा,तू ‘रहमत’ क्योंकि चलना ही जीवन हैबढ़ना ही जीवन हैजो चलते हैं वे बढ़ते हैं इसलिए ‘रहमत’उठना है तुझेचलना है तुझेबढ़ना है तुझेअगर लेनी  हैउस खुदा की रहमत O Bliss Don’t remain still —not worn out,not abandoned,not defeated or dulled,don’t just “remain”…Be bliss. For life is to move,to rise, to roam —those who walk,are the ones who grow. So, Bliss —you must rise,you must walk,you must flow,if ever you wishto touch eternal Bliss.

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    कवि की कल्पना (Kavi Ki alpana)

    कवि तेरी कल्पनाकी ऊंची उड़ानपल में लांघती पर्वतझरने, नदियां, समंदरतालाब, खेत-खलिहान,गगनचुम्बी मकानजाने कितने नगर‘गढ़’ और ‘बाद’ पहुँचती लहरातीतू सुदूर आकाशबादलों के पासऔर उस जहां भीजहाँ न पहुंचे रवि मगर हे कवि तेरीकल्पना की यहऊंची छलांगगर्वान्वित उड़ानअब भी अधूरी हैअब भी है भटकानअपूर्णता की छवि हैइसलिए तू कवि है Yet, You Are A Poet O poet, your mindsoars with wings of thought —leaping across mountains,cascading over waterfalls,crossing rivers, oceans,fields and barren lands,touching rooftopsof sky-kissing towers,wandering through towns,forts and distant domesbearing history’s name. You glide through skiesdancing with clouds,brushing the edgeof the unreachable—the realm where evensunlight dares not arrive. And yet, dear poet,your…

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    जो बात अधूरी थी छोड़ी(The Dreams Unwoven)

    सुनते सुनते मैं कह भी गयाकहते कहते तुम सुन न सकेदिल को मेरे तुम पढ़ न सकेखुलकर हम भी तो कह न सके आस तुम्हारे आने कीमैं पलक बिछाए रहता थातुम आते बतियाते थे औरजीवन सम्पूरण लगता थाजाते देख तुम्हें लेकिनदिल शोले शोले जलता था वो आलम था यह आलम हैअब जीवन में खालीपन हैतुम अपना गाँव बसा बैठेकहीं दूर देश में जा बैठेहम यहां फंसे जंजालों मेंसर पटकते हैं दीवालों से जो  बीत गयी सो बात गयीहो जीवन में शुरुआत नयीअब काश अगर यह हो जाएतकदीर राह गर दिखलायेतुम आओ बस तुम आ जाओजीवन में खुशियाँ भर जाओ जो बात…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    Say Something. . . .

    When silence loses its speech,And action forgets its reach,When even words have nothing left to teach —Say something. When policy masquerades as truth,And character isn’t counted as youth,When promises rust without proof —Say something. When the world celebrates in gold,But your inner winter grows cold,When the planet’s crowded,Yet you’re alone, untold —Call me… or just come close…And say something.

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    नन्ही (Nanhi)

    बढ़ी हुई मुश्किलों केहल जो न निकल सकेहालात न बदल सके‘विधा’ संग न चल सके मिटा भेद अपनों काघुटा दम सपनो काबढ़ी बौखलाहटहुई छटपटाहट विचारों की आंधी मेंघुमड़ा  चिंतनकौंधी बिजलीबरसा आसमान तो हुई सृजितमेरी ‘नन्ही’ कविता My Little Sweetheart When challenges grew tallerAnd no solution appearedWhen situations refused to changeAnd my art refused to walk with me… When the lines blurredBetween ‘mine’ and ‘not mine’When dreams began to suffocateAnd frustration began to rise… When a storm of thoughtsSwirled within my chestWhen lightning cracked the skyAnd thunder rumbled loud… Then —Born from that storm,Was my little poem.My first daughter.My first creationAfter…