कविता मेरी है (Kavita Meri Hai)

ये कविता है माँ
कविता मेरी है

मुझे बहुत पसंद है कविता
हम दोनो की जोड़ी सबको भाती है
माँ ये कविता है
कविता मेरी है

दुख सुख की साथी है मेरे संग वो
हँसती गाती मुस्कुराती है
वो जान मेरी है

मेरी कविता है
कविता मेरी है

जंगल पहाड़ नदी खेत खलिहान
मझे हर जगह घुमाती है साथ जाती है
हमसफर मेरी है

मेरी कविता है
कविता मेरी है

इशारा दे कान में कुछ कह कर
फिर खुद ही लजाती है इठलाती है
प्रेयसी मेरी है

मेरी कविता है
कविता मेरी है

व्यस्त जीवन में सीख नई दे कर
धर्म निभाती है झिंझोड़ जाती है
प्रिया वो मेरी है
मेरी कविता है
कविता मेरी है

मैं उसके बिन एक पल न जी पाऊँगा
सच कहता हूँ मैँ मर जाऊंगा
वो बस मेरी है
मेरी कविता है
कविता मेरी है

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