तेरे प्यार में गिरे थे किसी ज़माने में
उम्र गुज़र गयी कुल रूठने मानाने में
उम्र दराज़ मांग कर लाये थे चार दिन
दो तेरे दर्द में कटे दो ज़ख्म सुखाने मेंवो दिन थे खूबसूरत गोया क्या सुहाने थे
तेरी गलियों के लगाना चक्कर बहाने से
आईने की चापलूसी हमारी तौबा नहाने से
न थी कोई फ़िक्र दिन थे वो बादशाही के