मैं आज जो बीता हुआ एक पल हूँ
एक लम्हा और बीत जाने वाला पल हूँमैं भी कभी आज हुआ करता था
मेरा जलवा और राज़ हुआ करता थारौशनी होती थी मन के कण कण में
मेरा अपना सूरज होता था मेरे दामन मेंहंसी की धूप सदा खिलखिलाती थी
मेरे पसीने की फसल लहलहाती थीहुई शाम उजियारा धुंधलाने लगा
मेरे वज़ूद को अँधेरा खा जाने लगादेखते ही देखते रात मुझे निगल गयी
मेरी फितरत कल के धुंए में बदल गयीमैं बसता हूँ अब सिर्फ चंद यादों में
बेनूर बेअसर जैसे हो बात झूठे वादों मेंअनगिनत कड़ियाँ समेटे हुए गर्भ में
मुझे खंगालेंगे लोग अब अनेक सन्दर्भ मेंमें एक लम्हा था मुझे तो चले जाना था
मेहरबां शुक्रिया जो तुमने मुझे थामा थाजाने कब तुम वक्त की सीढ़ियां चढ़ गए
मेरे बीते हुए पल बस हाथ मलते रह गएये लम्हा जो तुमसे मुखातिब है एक पल है
जी लो इसे कि केवल यही तुमको हासिल हैचलो इसे अपने सूरज कि रौशनी से भर दो
दुनिया देखे कोई ऐसा चमत्कार कर दो