फ़ौज ने फ़ौजी को हरफ़नमौला बना दिया,
अनुशासन और तत्परता का पाठ पढ़ा दिया।
हर परिस्थिति में बंदे को जीना सिखा दिया,
सिविलियन वो रहा नहीं—एलियन बना दिया।
जो खोजने से न मिले—ऐसा जीव बना दिया।
जहाँ से फ़ौज में गया था—वो एक जंगल था,
अठारह साल लड़ा जिसे—वो उसका दंगल था।
दुनिया उसकी छीन ली तुमने आखिर क्यों?
फिर से जंगल के हवाले उसे कर दिया क्यों?
पत्नी, बच्चे, रिश्तेदार—सब इस पृथ्वी के हैं,
एक अकेला वही किसी और ज़मीन से है।
कोई मिलता नहीं जहाँ उसे खुद के जैसा,
रिश्तों-नातों से रीता—वो एक फ़क़ीर-सा।
एलियन-सी सोच लिए अलग फिरता है वो,
गंजों के शहर में कंघी बेचा करता है वो।
जिसे कोई भी नहीं सुनता—वो ऐसा गीत है,
अपना राग अलग अलापे—वो ऐसी बीन है।
पत्नी कहे—“हसबैंड मेरे प्यार नहीं करते,”
बच्चे पूछें—“पापा, किस दुनिया में रहते?”
जल्दी रात को सो जाते, भोर अँधेरे जगते—
चाबीवाला उसे बस एक खिलौना समझते।
फ़ौजी को जो बाँकपन सिखा ही दिया है,
एलियन तुमने उसको बना ही दिया है।
जंगल में लौटकर अब वो जा न पाएगा,
घर का न घाट का—क्या वो हो जाएगा…