कई कमरों का घर रहते जिसमें थे हम और बाबूजीकठिन परिश्रम से सींचा करते जिसको माँ बाबूजी अंतिम दौर में सिमट गए पर खुद ही खुद में बाबूजीरखते दिल की दिल में थे कहते न किसी से बाबूजी एक समय था जब कि बोलते हँसते थे सबसे बाबूजीबच्चों संग शतरंज छुट्टियों में थे खेला करते बाबूजी भोर हुए स्नान ध्यान थे सिखाते हमको बाबूजीमाँ खाना दे देती तब हम सबको थे पढ़ाते बाबूजी प्यार समक्ष वैसे तो न थे कभी जताते बाबूजीजाना होता कहीं तो दूर तक छोड़ने आते बाबूजी माँ गुजरी जब रोये बहुत थे फूट पड़े थे बाबूजीमाँ…
ज़िन्दगी की सरसराहट…
कभी फुर्सत में जब बैठे सिलसिले पास आ बैठेलौट आये हंसी लम्हेजो बिताये संग यादों के ज़िक्र छेड़ा फिर होले से मचलती इन हवाओं नेदास्ताँ अपने रिश्ते की जब महकी थी फ़िज़ाओं में तुम्हें मिलने से पहले याद आता है वो आलमजब हमसे दूर होता था बहारों का हंसी मौसम बेसबब ही लगता था सुबह की धुप का आनाबेअसर चमन में खिलती कलियों का मुस्कानाझलक पाने को एक तेरी हमारा इंतज़ार करनानज़र हम पर कब हो तेरी बस यही सोचते रहना तसव्वुर में हमारे तेरा वो तस्वीर बन आनातेरे मिलने से जैसे हो किसी ज़न्नत का मिल जाना आज भी साथ तुम…
पनघट पर घेरि के श्याम सुन्दर मोहे मुरली मधुर सुनाय गया कजरारे नयन चंचल चितवन मोहे अपने ही रंग रँगाय गया सखी सोई सपनों में खोई मैं अखियन सों नींद उड़ाय गया तितली सम उड़त रहूं बन बन तन मन उमंग जगाय गया ऋतु सावन मधुर सुहानी लगे बन बदरा जल बरसाय गया चितवन की आभ लई मोरी मुख से चुनरी सरकाय गया चन्दन संग लिपटे भुजंग ज्यों उर मोहे कान्हा लगाय गया निस दिन छलिया का नाम जपूँ अंतर्मन मोरे समाय गया कान्हा संग प्रीत लगी मोरी जिनके संग हार सिंगार गया प्रेम के बस ढाई आखर सुध बुध तन…
एकिच घडी में अपुन के भेजे का घंटाल बजा गेली तूअच्छा खासा था बंदा अपुन बन्दे की वाट लगा गेली तूमुंबई के निपट टपोरी को नज़रों के जाम पिला गेली तूजानी लिवर बन फिरता था उसको सलमान बना गेली तू ठीक ठाक अपुन का लाइफ था बिंदास बड़ा स्टाइल थाइश्क़ में येड़ा बनने को अरे किधर अपुन पे टाइम थापम्मी आंटी की मैरिज में काएको रूमाल गिरा गेली तूदिल थाम अपुन बैठेला है दिल को करेंट लगा गेली तू तू डांस बड़ा कररेली थी और फोटो भोत खिचा रेली थीभाई के दिल में तेरी उल्फत बुमाबोम शोर मचा रेली थीजेंटलमैन…
मनाओ जश्न कि कोई मर गयाकिसी के लिए जगह खाली कर गयाकिसी को मगर सवाली कर गयामनाओ जश्न कि कोई मर गया काँधे पे था बोझ बोझ उसके शरीर काबोझ अपनों का और परायी पीर काहर तरह के बोझ से हो फारिग गयामनाओ जश्न कि कोई मर गया भटकन थी उसके जीवन की राह मेंकभी दोस्ती कभी दिल की चाह मेंकिसी की उल्फत में फ़ना होकर गयामनाओ जश्न कि कोई मर गया ज़िन्दगी थी बेवफा देखो देगा दियामौत की सच्ची वफ़ा में वो चल दियाजन्मों का होगा साथ इस यकीन पर गयामनाओ जश्न कि कोई मर गया लौट न पायेगा…
दिल में दबे जज्बात हैं कितने क्या समझो तुम क्या जानोतुमसे कितने ख्वाब सजे तुम क्या समझो तुम क्या जानो बातों बातों में तौबा जो पलकों को झपकाती होमाथे पर बालों की लट को हौले से सुलझाती होऔर शरारत करूँ जो तुमसे छुईमुई बन जाती होमेरा दिल ले जाती हो तुम क्या समझो तुम क्या जानो दिल में दबे जज्बात हैं कितने क्या समझो तुम क्या जानोतुमसे कितने ख्वाब सजे तुम क्या समझो तुम क्या जानो रंग तुम्हारे काजल का काली रातों से आया हैअम्बर से आँचल पर जैसे तारों को जड़वाया हैचेहरा इतना नूरानी है देख चाँद भी जलता…
हरे भरे गुलशन में देखो नित नए नए से रंग दिखेकलियाँ कुछ फूलोंके रूप में फूल फलों में बदले सबके दिलों को खूब लुभाती सुंदरता उपवन में खिलेप्रकृति का यह स्वरूप ही मानव को भगवान लगे उन पेड़ों का क्या कहिये जो बढे मगर फल न लगेमाली ने सींचा था सबको कि सब पौधे फूलें फलें श्रम का तू ईनाम भुला दे माली फ़िक्र क्यों करता हैपरिश्रम का परिणाम सदा नहीं सुखदायी होता हैमन में रख गीता में अर्जुन को श्रीकृष्ण के प्रवचनकर्मण्येवाधिकारस्ते माँ फलेषु कदाचनः क्या हुआ तेरे कर्मों को जो पहचान नहीं मिलीकल सफलता की किरणें तुझ पर…
खुदा मिलता नहीं कभी ऐश-ओ-आरामों मेंतेरी तकलीफ में पर आगे खड़ा रहे सदा ग़मों का ग़म न कर है बड़ा ग़रीब नवाज़भला करेगा बख्श देगा तेरी हर खता है जिसका ज़िक्र मन्त्रों और आयतों मेंज़र्रा ज़र्रा तुझे देगा उसी का पता अब जो खोया है दौलतों शोहरतों में तूनहीं पायेगा मेरे परवरदिगार का पता नेक नीयत ज़ुबान साफ़ रूह पाकीज़ापाक दिल में ही रहता है वो मेरा खुदा
गए रोज़ खयालात मेरे चुपचाप थेज़िन्दगी के अजीब बड़े हालात थेगए रोज़ ख़यालात मेरे चुपचाप थे न था होश मुझे न आवाज़ दी आपनेहमने बताया भी नहीं न पूछा आपनेवर्ना दरमियाँ हज़ारों दबे सवालात थेगए रोज़ ख़यालात मेरे चुपचाप थे एक वक्त था न होते थे ज़मीं पर पैरआलम है अब न अजनबी हैं न गैरहौसले आसमानों कभी हम उस्ताद थेगए रोज़ ख़यालात मेरे चुपचाप थे बमुश्किल थामी हैं दिल की धड़कनेंसुलझाई हैं कुछ ज़िन्दगी की उलझनेंगम-ए-इश्क़ में हम वर्ना बीमार थेगए रोज़ ख़यालात मेरे चुपचाप थे मिल गए हैं जो अंजानी इस राह परकर लो शिकवा दिलों की चाह…
गोरी पियाजी के घर को चलीदुनिया किसी की बसाने चलीकितनों के अरमान ढीले हुएटुकड़े दिलों को बनाकर चली लड़कों के दिल का तस्सवुर थी वोसारे मोहल्ले की रौनक थी वोआसिक सब ता ता थैया करेंऐसी धमक बजती ढोलक थी वोजब से सजनी का रोका हुआउनकी उल्फत से धोखा हुआबैठे हैं अब सर पटकते हुएरहम ऐ खुदा रोक लो वो चली गोरी पियाजी के घर को चलीदुनिया किसी की बसाने चलीकितनों के अरमान ढीले हुएटुकड़े दिलों को बनाकर चली जोश-ऐ-जवानी फ़ना कर गयीरानी किसी और की हो गयीसेविंग्स से अपनी था पाला जिसेएफडी किसी और की बन गयीआँखों को दिन में…
ज़ज़्बात की मेरे अजी बोली न लगाओबाजार में हर चीज़ बिकाऊ नहीं होतीछोड़ दो आदत कि हर शै की है कीमतबाज़ारू फसानों में नसीहत नहीं होती में लिख रहा हूँ जो भी ये दिल की है आवाज़दिल के खालिस ज़ज़्बात हैं ये सेल नहीं हैलफ़्ज़ों में ताक़त छुपी दुनिया जहान कीशायरी एक हुनर है कोई खेल नहीं है अशआर मेरे दिल के मैं बेचूंगा किसी रोज़बिक रहेगी जिस रोज़ ममता दूकान मेंफूलों की महक ताज़ी हवा मोल मिलेगीइंसानियत पर दांव लगेगा बाज़ार में मेरी कलम से फुट चले हैं दिल के जो नालेबेकार नहीं जाएगा इन झरनों का बहनादे कर…
दिन दिवाली का हो दीपक तुम्हाराघर किसी और का तो क्या बात हैथोड़ी मिठाई नए कुछ कपड़ेबालक गरीब का तो क्या बात है हज़ारों रुपये हम पटाखों में फूंकेंआब-ओ-हवा को दूषित करेंकूड़े करकट से कुल धरती अटी हैसफाई कर्मचारी बेबस रहेंप्रकृति माँ का भला तनिक सोचेंपटाखों से हो तौबा तो क्या बात हैघर की सफाई तो सभी करते हैशहर साफ़ रखें तो क्या बात है दिन दिवाली का हो दीपक तुम्हाराघर किसी और का तो क्या बात हैथोड़ी मिठाई नए कुछ कपड़ेबालक गरीब का तो क्या बात है सच्ची ख़ुशी का मन्त्र है यह सुन लोयूँ ही किसी एक मुफ़लिस को चुन लोखाना खिलाओ …
तन्हाईयों के महल में रहते हैं वो याद बनकरकभी रहते थे दुआओं में जो फ़रियाद बनकर वो था मंज़र फुर्सतों का ये हकीकतों का दौर हैवक्त गुज़र चुका है अब हमसफर कोई और है हर शै है हासिल और सब अपने हैं साथतन्हाई में मगर रूबरू आ जाते हैं आप ज़माना गुज़र गया है उम्र दराज हो गयी हैगुज़रे लम्हों की यादें ताज़ा और नई हैं जहाँ में कहीं भी हों वो खुश रहें आबाद रहेंइल्तिज़ा है मेरी यादों के ताज महल में रहें
धरती के विशाल सीने में कहीं एक हलचल हुईबीज फूटा कुछ बिखरा और आवाज़ चटक हुई एक नन्हे से पौधे ने चीर डाला धरती का सीनाकिसी की मेहनत खिली और रंग लाया पसीना अंगड़ाई लेकर वह बढ़ चला आसमां की ओरक्या जोश क्या उमंग ज़माने ने देखा उस ओर देखे सपने कि देगा छाँव, लकड़ी और फल भीलगने लगी बोली उसकी नस नस रग रग की अपनी कीमत जानकर वह पौधा भी हैरान हैदुनिया में उसकी इतनी बड़ी पहचान है घायल धरती का कोना जिसमें घाव लगावह बीज जो पौधे के अस्तित्व में मर मिटा माली जिसने इस यथार्थ को…
A B से जब कुछ कहता है B दोहराता है C सेC A जब बन जाता है तो फैले बात बड़ी तेजी से बातों ही बातों में सारा शहर बन जाता A और Cक्योंकि भेड़चाल में आसानी से मिल जाते हैं B रफ्ता रफ्ता शहर का माहौल उग्र हो उठता हैहर शख्स होकर इंक़लाबी मशाल थाम लेता है फूंक डालता है अपने भारत की संपत्ति कोजला डालता बसें आशियाने और प्रगति को फिर भी जी न भरे तो चढ़ जाता है धरने परपीछे चलती भीड़ अंधी जो आमादा है मरने पर दूर बैठकर कहीं XYZ हसते जश्न मनाते हैंलड़ा कर जन…
पेड़ मैं नीम का उग आया एक मकां के दरवाज़े परकिसी जोड़े ने मुझको सींचा और दी मैंने छाँव घर पर मेरी आँखों ने देखा कई पीढ़ियों को बनते बिगड़तेबढे वो साथ साथ सुख दुःख में भी साथ साथ रहते बुजुर्गों ने रखा मुझसे रिश्ता जैसे था मैं हिस्सा घर कामेरी छाँव में बैठ पीते हुक्का लेते फैसला हर तरह का मगर पिछले हफ्ते नयी पीढ़ी ले आयी घर में नई सोचबाँट दिए बूजुर्ग कई हिस्सों में घर भी बिकेगा एक रोज़ मैं भी बाहर खड़ा कहीं उनकी निगाहों में खटक रहा हूँमहँगी गाडी के रस्ते का रोड़ा बना हूँ…
हज़ारों चेहरों के दरमियाँ इंसां इक सगा होता हैबनकर के जो खास दिल के नगर में जगह लेता है कैसे कोई मन ही मन सपनों के महल सजा लेता हैबना कर किसी को देवता मन मंदिर में बिठा लेता है बढ़ती रहती है ज़िन्दगी और बदलती है ज़िन्दगीसाथी मन का मगर मन मंदिर में बसा रहता है गुज़रते वक्त के साथ हर चीज़ पुरानी होती हैसपनों का साथी मगर हर वक्त जवां रहता है यार मिलते हैं बिछड़ते है रिश्ते और नए बनते हैंआखिरी सांस तक वह शख्स अपना बना रहता है किसी के मन मंदिर में तुम भी घर…
हंसकर यूँ ज़ज़्बात छुपाते क्यूँ होअंदाज़ की तल्खी को दबाते क्यूँ होखफा हो तुम जो तो कह दो हमसेयूँ नज़र फेर हमको जलाते क्यूँ हो ज़िन्दगी खेल है तुम ऐसे जिया करते थेहर इक लम्हे को क्या खूब जिया करते थेदर्द किसका है कहो बात बनाते क्यूँ हो हंसकर यूँ ज़ज़्बात छुपाते क्यूँ होअंदाज़ की तल्खी को दबाते क्यूँ होखफा हो तुम जो तो कह दो हमसेयूँ नज़र फेर हमको जलाते क्यूँ हो हाल-ए-दिल बातों बातों में निकल जाने दोआँखों से दिल के ज़ख्मों को बह जाने दोमैं कोई गैर हूँ ये एहसास दिलाते क्यूँ हो हंसकर यूँ ज़ज़्बात छुपाते…
कोशिशें तमाम बेकार हुईंजेहन की पशोपेश मगर हार हुईख़्वाबों को बेइंतेहा दौड़ायाहुनर चुन चुन लफ्ज़ ले लायाकोई तक़रीर न उतरी मगर कागज़ परजेहन गया तभी यादों की चाबुक परतन्हाई के ज़ख्म कुछ गहरे हुएदर्द बह निकले जो थे ठहरे हुएबूंद बूंद लहू गिरा चाहत कादिल रोया जो भरता था दम राहत काकुछ था भीतर जो पिघल गयाबन के नगमा मेरी यादों से निकल गया When Words Wouldn’t Come All efforts fell silent,The mind wrestled but met its defeat.Dreams were chased with endless hunger,I gathered words with delicate precision—But no speech would settle on the page. My thoughts slipped—Whipped back into…