फलक से तारे लाना चाहता हूँ तुम्हें मंज़ूर हो तोचाँद पर घर बनाना चाहता हूँ अगर मंज़ूर हो तो तुम्हारे गेसुओं की स्याही ले कर रात उतरीनूर-ऐ-नज़र से बहकी फ़िज़ा है और निखरीनूर-ऐ-नज़र से बहकी फ़िज़ा है और निखरीज़रा काजल चुराना चाहता हूँ तुम्हें मंज़ूर हो तोलबों पे शेर पढ़ना चाहता हूँ अगर मंज़ूर हो तो फलक से तारे लाना चाहता हूँ तुम्हें मंज़ूर हो तोचाँद पर घर बनाना चाहता अगर मंज़ूर हो तो तुम्हारी हर अदा पर आह भरते इश्क़ वालेबहुत होंगे नज़र और गेसुओं पर मरनेवालेबहुत होंगे नज़र और गेसुओं पर मरनेवालेकलम सर मैं कराना चाहता हूँ तुम्हें…
ज़िन्दगी की सरसराहट…
ज़ुल्म का अत्याचारकरता जाता नरसंघाररोता विश्व ज़ार ज़ारसरकारें लाचारघोर हाहाकारसुन चीख पुकारसर होता खून सवार पुलिस लाचारकानूनी तक़रारमात्र रुदन अपारपापियों की जयकारन्याया व्यवस्था बीमारसंशय संदेह की भरमारराष्ट्र संपत्ति धुआधारआखिर कौन ज़िम्मेवार तूतू मैंमैं का प्रचारमीडिया कारोबारकर्त्तव्य रहा हारअधिकार की पुकारदेश पर गर हो वारतो किसका सारोकार बंद करो दुष्प्रचारजो ये झगडे हज़ारहै बस यही सूत्रधारमत लड़ो निराधारभारत बने एक परिवार The Roar of Injustice Tyranny unleashed,Slaughtering innocence,The world weeps—Governments stand helpless,Chaos echoes,Cries flood the sky,Blood boils over reason. The law is handcuffed,Justice tangled in debate,Only grief floods the gates,While the sinners are hailed,Our system lies diseased,Doubt and suspicion reign,Nation’s wealth…
मौत ने फिर चाल चली कोई गुज़र गयाऔर एक बेचारा हसरतों में हो दफन गया चाँद छूने के तो नहीं देखे थे उसने ख्वाबपर कम मिला जो मिला इसी सोच में गया दुनिया की दौड़ में न जब उठ सके उसके पैरकोई हाथ थाम लो.कह गला उसका भर गया दोस्त सब अपने थे मगर मतलब के थे यारबर्बाद उस शख्स को यह पतझड़ कर गया रिश्ता मेरा कोई ख़ास न था बदनसीब के साथगयी रात मगर मैं बोझ लिए दिल पे घर गया अब हसेगा न उस पर न बनेगी कोई बातखुद पर तंज़ करने वालों का मुंह बंद कर…
छोटी खुशियों में छुपी बड़ी बड़ी बातें हैंघर में सब अपनों मिली ये सौगातें हैंखुशियों का टोकरा हम भर लाते हैंशादी की सालगिरह की पार्टी मनाते हैं लम्बे समय बाद यह मौका आया हैसभी अपनों को घर हमने बुलाया हैझूमने का अवसर चलो नाचते गाते हैंशादी की सालगिरह की पार्टी मनाते हैं घर की रसोई में बने नए पकवान हैंनए कपडे फूलमाला बढ़ा रहे शान हैंरौशनी से सारे घर को जगमगाते हैंशादी की सालगिरह की पार्टी मनाते हैं खुशियाँ के मेले सदियों तक लगे रहेंरिश्ते की डोरी में हम यूँ ही बंधे रहेंसंग जीने मरने का वचन दोहराते हैंशादी की…
माफ़िक़ न सही हर रिश्ता निभाया है हमनेगैर ज़माना हुआ मगर साथ निभाया है हमने आसान राहों से लोग छू लेते हैं आसमानफ़र्ज़ की ज़मीं पर आशियाँ सजाया है हमने लड़खड़ाए कभी गिरे मगर फिर चल दिएज़िन्दगी तेरा हर क़र्ज़ चुकाया है हमने खुदा के वास्ते न करो ज़िक्र-ए-मंज़िल हमसेबाकायदा राहों को मंज़िल बनाया है हमने कोई तो बात है ज़िक्र अपना है हर ज़बान परचराग रोशन रहें घर अपना जलाया है हमने Not Perfect, But True Every bond, though flawed, I held till the end,Though the world turned stranger—still, I remained a friend. Some touch the sky on paths…
भारत की बेटी यह भारत की बेटीभाग्य देखो कैसे कैसे लाती है बेटी लाल बत्ती पर फटे मैले कपड़ों मेंनाचती है करतब दिखाती है बेटी कच्ची उम्र से ही कलाबाज़ी खातीलोहे के रिंग से गुजर जाती बेटी इतिहास के खेलों को रख रही ज़िंदारजवाड़ों नवाबों की विरासत है बेटी स्कूल न पढ़ाई बचपन के खेल नहींघर का बोझ कांधों पर ढोती है बेटी घर पर भी माँ के काम काज बंटातीछोटे भाई बहन को खिलाती है बेटी माँ बापू मज़दूरी में मज़बूर रहते हैंचार पैसे घर में कमा लाती बेटी ब्याहने के बाद ससुराल और नैहरदो घरों की परंपरा में…
किसने फेंका है ठहरे पानी में पत्थरहवा को बांधने की ज़ुर्रत की हैकौन उजाड़ रहा है घरोंदे चिड़ियों केपरिंदों को डराने की साज़िश की है कमज़ोर नहीं हिन्द का चैन-ओ-अमनसदियों की रवायतें इसमें शामिल हैंनफरतों की आग में जो सेक रहे रोटीन तो वो हिन्दू हैं न ही मुस्लिम हैं फिर किसकी शै पर है ये फिरकापरस्तीजेहन में ज़हर भरने की हिमाकत की हैइंसानी चेहरों के पीछे किन शैतानों नेसदियों को साल बताने की कोशिश की है किस पर इलज़ाम दें किससे करें शिकवाशहर में काला पानी बरसा जो बीती रातहसरतों से लगाए दरख़्त सब ढह गएखाने को बचे सिर्फ…
बदहवास दौड़ती फिर रही है ज़िन्दगीधुआं धुआं गर्द सिमटती शहरवालों में आदमी ही आदमी मिलते तो है दुकानों मेंआदमी से आदमी मिलता नहीं मकानों में जश्न मनाने में करोड़ों फूंक देते हैं लोगबिलखते बच्चे कहीं हालात की पनाहों में अधूरी सी लगती है शख्शियत आजकलजाने क्या छोड़ आये हैं उन निगाहों में शम्मा बुझेगी कब या जलेगी कब तलकचर्चे इस बात के नहीं होते अब परवानों में उसके ज़नाज़े में उमड़ आया था शहर तमामएक चेहरा मगर नहीं था शामिल मेहमानों में वो आदम की बेटी थी जो जला दी गयीक्या ख़त्म हो गए हैं ज़ज़्बात हुक़्मरानों में जो देखा…
मंज़िल है दूर तन्हा सफर जीत होगी कलपेश आएगी मुश्किल ज़रा संभलकर चल माना फेर ली हैं सब अपनों ने निगाहेंकोई नहीं जो मुश्किल में हाथ थामेभरोसा रख ये दौर फिर होगा न कलबन्दे तेरी उम्मीद का खिलेगा कमल मंज़िल है दूर तन्हा सफर जीत होगी कलपेश आएगी मुश्किल ज़रा संभलकर चल आदत लोगों की बढे कदम पर टोक देंअपनों से मिलते ज़ख्म यारों से धोखेबदलेगा न ज़माना तू खुद को बदलतुझ से बंधीं उम्मीदें तू करेगा पहल मंज़िल है दूर तन्हा सफर जीत होगी कलपेश आएगी मुश्किल ज़रा संभलकर चल रख खुदा को हाज़िर फ़र्ज़ अदा किए जादुआएं मिलेंगी तुझको…
बड़ा अनोखा अंक है दोएक और एक बनाएं दोदो के बीच जो तीजा आयेकिस्सा खत्म हुआ समझो दिन हैं चक्की दो हैं पाटएक है दिन तो दूजी रातजीवन चक्र है जनम मरणसुख दुःख में पिसते दिन रात दो आँखों से होता दर्शनकान दिए सुनने को दोदो हाथ सब काम बनातेदो पैर मिले हैं चलने को घर परिवार के दो स्तम्भएक पुरुष दूजी नारीस्वर्ग नर्क दो अंत सभी केजीवन-मृत्यु सृष्टि हारी दो को एक जो पाना हैदो बातों का रखो ज्ञानदो हाथों से सेवा कर लोपाप पुण्य दो देना ध्यान इन नियमों को मानो अगरसब दो पा जायेंगे एकएक ही ईश्वर…
सुनो आज ‘एक’ की महिमावृहद् अनोखा इसका ज्ञानअंक नहीं यह केवल ‘एक’गाथा है अत्यंत महान एक है ईश्वर वही साध्य हैएक सूर्य और एक गगनएक अनोखी पृथ्वी अपनीएक चन्द्र संग लगी लगन एक जन्म मानव पाता हैएक शरीर निभाता साथएक मस्तिष्क और एक आत्माएक जिह्वा जो करती बात एक अंग जो सृष्टि रचतापेट एक हमेशा खालीएक कोख से शुरू कहानीएक मृत्यु ने सृष्टि पाली एक बात मुक्ति की समझोचंचल मन पर काबू कर लोएक डगर सच की अपनाओएक ईश्वर स्मरण कर लो Ode to One – The Power of Unity Listen, today we sing of One—A sacred truth, not just…
तुम आये जो करीब मिलते हैं लोग अदब सेहाथों में है हाथ अब डरते हैं सिर्फ रब से अक्सर बिना हमारे महफ़िलें नहीं सजतीयारों की जुबां पे अब तारीफ़ रहती अपनी लाखों हैं चेहरे जहाँ में पर नज़र नहीं ठहरतीदावत-ए -दिल तुमको है दे दी है चाबी घर की मशहूर हम हुए हैं तेरे इश्क़ का असर हैगैरों का क्या है कहना अपनी नहीं खबर है ख्वाहिश नयी ख्वाब नए धड़कन लगे नयी सीतेरा करम है मुझ पर हैं मेरी खुशनसीबी तेरा प्यार छू गया है अब दिल का यही पता हैलगे हर शख्स अपना बस मेहरबान खुदा है जलते…
घडी भर को सुनो गोरी मेरे पहलू में आनाअपने मम्मी डैडी से ज़रा बच बच के आनातू भी खुद को मेरे डैडी की नज़रों से बचानाखामख्वाह ही मुहब्बत में कहीं पिट न जाना तेरी उल्फत का मुझ पर चला है तीर ऐसाउछलता फिर रहा हूँ मैं किसी बन्दर के जैसामिलन के गुड़चने अपने हाथों से खिलानामगर अदरक सुनो गोरी भूल से मत ले आनाघडी भर को सुनो गोरी मेरे पहलू में आनाअपने मम्मी डैडी से ज़रा बच बच के आना मैं भी जां तेरी नज़रों की हुई हूँ ऐसी कायलबांके छोरे मोहल्ले के मुझे दीखते हैं पागलअपनी तनख्वाह सारी डार्लिंग…
सुबह से मन उदास है माँ नहीं है पासचली गयी है वो किसी दुसरे जहान मेंबादलों के पार बन के तारा आसमान मेंरोम रोम में मगर बसी है उसकी यादसुबह से मन उदास है माँ नहीं है पास माँ की हर आहट पहचानता था मैंदुनिया थी मेरी बस इतना जानता था मैंरहेगी साथ माँ हमेशा सोचता था मैंछोड़ जायेगी ऐसे कहाँ जानता था मैंमाँ गयी ले गयी हर ख़ुशी अपने साथबदल गए रिश्ते जो उसने छोड़ा हाथ बैठी अब दीवार पर तस्वीर बन के माँएकटक ममता से मुझे तक रही है माँसाल भर के बाद आज हो रहा है श्राद्धभोग में…
सज्जन सत्य को जीवन का सिद्धांत बना लेते हैंउत्कृष्ट चरित्र से खुद की एक पहचान बना लेते हैंअगली पीढ़ी को भी सत्यमार्ग सुझा देते हैं सज्जन सत्य को जीवन का सिद्धांत बना लेते हैंउत्कृष्ट चरित्र से खुद की एक पहचान बना लेते हैं श्रीराम का सारा जीवन घोर तपस्या का व्रत हैपुरुषार्थ ही उनके चरित्र में मोक्ष मार्ग का रथ हैमन का संयम धैर्य शांति अवतार बना देते हैंसज्जन सत्य को जीवन का सिद्धांत बना लेते हैं श्री कृष्ण रूप में भी जग को प्रेम का पाठ पढ़ायाप्रेम के बल पर ईश्वर से साक्षात्कार करायाप्रेम से रहते प्राणी जग को…
स्वप्न नहीं वे जो मनुष्य को नीदों में दिखते हैं स्वप्न तो वे हैं जो आँखों से नींद उड़ा देते हैं अब्दुल कलाम तुमको सलाम लाल भारत माता के मिसाईलमैन के नाम से दुनिया में पहचाने जाते महाकर्मयोगी लेकिन धरती से जुड़े रहे वो भारत का स्वाभिमान रहे आजीवन लगे रहे वो साधारण व्यक्तित्व मगर असीम ऊर्जा के सागर अंत समय तक महामहिम रहे देते ज्ञान बराबर सर्वधर्म समभाव के पोषक राष्ट्र प्रेम का साया भारत में सब भारतवासी का सिद्धांत बताया छोटे बड़े बुजुर्ग सभी आदर्श बने सबके तुम ज्ञानज्योति बन अमर रहोगे भारत के दिल में तुम महापुरुष…
क्यों हो खामोश क्यों इतने हैरां होक्यों हो जैसे अजनबी कुछ तो कहोक्या ग़लत हुआ है क्या बदल गया हैकसम है तुमको यार कुछ तो कहो तेरी ख़ुशी के लिए ही मैं जी रहा हूँज़ख्म अपनों के बस दर्द पी रहा हूँफेर ली तूने नज़र तो टूट जाऊँगातनहा अँधेरे में मैं गुम हो जाऊँगाजो चाहो अगर सजा मुझे दे दो रूठकर मुझसे दूर यूँ चली जाओ नथाम लो हाथ मेरा अब लौट आओ नज़िद न छोड़ी तो मेरी जान जायेगीदर्द-ऐ-दिल सुनो तनहा न सहो हंसी आयी लब पर कलियाँ खिल गयींडूबती धड़कनों को ज़िन्दगी मिल गयीभूलकर भी अब मुझसे न…
किस विधि वर्णन करूँ मैं केशव महिमा तेरी को अपारमहा महाभारत के युग में अवतरे तुम बनकर सूत्रधार कौरव वंश और पांडव वंश दोनों का पाया सम्मानअर्जुन को दे गीता ज्ञान किया समस्त शंका निदान लीला रचकर लीलाधर श्री प्रेम का अद्भुत मान बनेसखा गोपियाँ भक्त तुम्हारे तुम चितचोर महान बने मित्र सुदामा को दे आतिथ्य भगवन ने उपकार कियाब्रिज जन रक्षण हेतु तुमने गिरि गोवर्धन धार लिया प्रेम स्वरुप हो प्रेमाधार तुम प्रेम प्रकाश था फैलायामहारास गोपिन संग रच कर भगवद्स्वरूप दिखलाया बंसी बजईया रास रचईया कृष्ण कन्हैया आ जाओधरा डूबी फिर धर्म ग्लानि में धर्म मार्ग दिखला जाओ किस…
दो चार अक्षर डारि के दाब दिया जो ‘सर्च’सूचना पूरी मिलै पैसा होय न खर्चहोवे कछु न खर्च नौकरी पक्की पावैबलिहारी इंटरनेट बिगरे काज बनावेकहत ‘बिरजू’ कविराय नित ऑनलाइन रहियेकलयुग के अवतार जय गूगल की कहिये फेसबुक लीला देख के भये कवि जी दंगएक क्लिक पै मिल गए यार पुराने संगयार पुराने संग मस्त चैटिंग मेँ रहतेपत्नी से हाय बाय फेसबुक पर ही कहतेशहर गाँव का फर्क इंटरनेट ने बिसरायानवयुग का हथियार सूचना क्रांति लाया व्हाट्सएप्प से जो जुड़ गए कविवर भये निहालफोटू संग मैसेज करें बदली श्री की चालबदल गयी सब चाल स्मार्ट मोबाइल के चलतेसंता बंता जोक कवि…
मुफलिसी और फाकों में पैदा हुआज़िल्लत और ठोकरों में पला था मैंमेरी खता मेरा गुनाह बस इतना थापेट की भूख से न लड़ सका था मैं छीन लेने की लत इस कदर बढ़ीरोटी से इज्जत तक सब छीना मैंनेजब नहीं मिला मन के मुताबिक़फ़ेंक तेज़ाब चेहरों पर जलाया मैंने भाग गया कानून के शिकंजे से दूरगुम हो गया फिर आज और कल मेंबदहवासी जिस मुकाम पर तमाम हुईफंसा था मैं दहशतगर्दी के दलदल में जेहाद के नाम पर बरपाया खुनी कहरतबाह किये आशियाने काँप गए शहरकर दिए बंद दरवाजे सभी ज़मीर केवक्त रहते असलियत न आयी नज़र सलाखों के पीछे…