• ज़िन्दगी की सरसराहट...

    कल्पना (Kalpana)

    ‘कल्पना’अब बड़ी हो गयी हैबचपन से ही उसेबड़े लाड प्यार से पाला है वह अगर गिर जाती या  फिरज़रा सी भी चोट लग जातीतो दिल बैठ ही जाता था मगर अब सब ठीक हैवह बड़ी हो गयी है न ! अब वह बाहर जाने के लिएमुझसे नहीं पूछती है खुद हीस्वच्छंद इधर उधर, यहां वहां,गलियां कूचे, गाँव शहर,देश विदेश,आसमान पर्वत,बादल झरने लांघतीकहीं भी चली जाती है और मुझे भी चिंता नहीं रहतीअब वह बड़ी हो गयी है न ! आखिर मेरी ‘कल्पना’मेरी बेटी जैसी ही तो है,और मेरे मन का शहर भीदिल्ली जैसा  नहीं है, है न ?

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    बड़ा आदमी (Bada Aadmi)

    बड़ों से सीख मिली थी बचपन में “अच्छे बच्चे हो सुबह जल्दी उठो भगवान् में विश्वास रखो पुण्य करो ईमानदार बनो और झूठ मत बोलो अगर बड़ा आदमी बनना है तो ” जैसा बोला था उसने सब किया और बड़े होकर क्लर्क बन गया बस जरूरतें ही पूरी कर पाया हाँ उम्र से बड़ा आदमी बन गया

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    गौ माता (Gau Mata)

    गाय जगत की माता है पता है मगर अबपिता से भी अधिक अड़ियल हो गयी हैसड़क अगर घेर ले तो मजाल क्याकि आते जाते ट्रैफिक को रास्ता दे देआँखें बंद किये रहती है और कहती है‘मुझे छेड़ा अगर तो दूध माफ़ नहीं करुँगी’

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    राज-नीति-शस्त्र(Raaz-Neeti-Shastra)

    ‘राज’ और ‘शास्त्र’ दो दोस्त हैं‘नीति’ ‘राज़’ की सौतेली बहन है‘शिक्षा’ ‘शास्त्र’ की पड़ोसन हैऔर ‘नीति’ की बाल सखी है एक दिन सावधानी हटी और‘शास्त्र’ के साथ दुर्घटना घटीवह पूरी तरह ठीक तो हो गयामगर उसका एक हाथ कट गयाअब वह केवल ‘शस्त्र’ रह गया थाऔर ‘राज’ का सेवक हो गया था और दो पात्र हैं, एक है ‘सभ्य’जो दुसरे पात्र ‘समाज’ काका इकलौता लाडला बेटा है‘समाज’ एक बूढ़ा’ किसान हैऔर ‘सभ्य’ गबरू जवान है ‘राज’ ‘नीति’ को बहन नहीं मानता‘शिक्षा’ ‘राज’ को चाहती है  मगर‘शस्त्र’ के कारण  डरती है औरअब तो‘नीति’ से भी उसकी अनबन हो गयी है ‘नीति’…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    Branded

    ब्रांडेड का चलन आज आम हैब्रांडेड ही सर्दी और जुकाम है धागा लोकल कपड़े ब्रांडेड हैंगाय लोकल है दूध ब्रांडेड हैसाबुन तेल तौलिया शैम्पू जोसब ब्रांडेड है तो मिलावटकिस चिड़िया का नाम है ब्रांडेड का चलन आज आम हैब्रांडेड ही सर्दी और जुकाम है ब्रांडेड का ऐसा चस्का लगाकि गली के कुत्ते को किसीभलेमानस ने पुराने कपडे जोपहना दिए कि ठण्ड से बचा रहेतो उन्होंने हंसकर कहा“See! कपड़े ब्रांडेड नहीं हैंकिसी छोटे आदमी का काम है” ब्रांडेड का चलन आज आम हैब्रांडेड ही सर्दी और जुकाम है

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    जाने भी दो (Jaane Bhi Do)

    जिस्म में एक सौ छह हड्डियां एकसाथ टूटने का दर्द मैं नहीं जानता मगरदो सौ सत्तर रातें अनजाने किसी डर में रहने का इल्म है . . खैर जाने दो खुश  खबर  मिलने  से  अब  तक हर  तल्खी मेरे हिस्से में आयी है मगरतुम खुश रहो इतना ही बस चाहा मैंने और चुपचाप रहा . . खैर जाने दो जानता हूँ मेरे सिवाय कोई नहीं जिसको तुम हाल-ए-दिल कह सको मगरतुम ही कहो मैं अपना हाल किसे बताऊँ जो तुम न सुनो . . खैर जाने दो तुम्हारी छोटी से छोटी ख़ुशी के लिए मैं हद से गुज़र जाना चाहता…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    दिलवाला जांबाज़ अर्जन सिंह (Dilwala Zaanbaaz Arjan Singh)

    जांबाज़ दुनिया में होंगे बहुतदिलवाला जांबाज़ देखा नहींअर्जन सिंह जैसा योद्धा खिलाड़ीऔर नेकदिल इंसान देखा नहीं पढ़ाई में अव्वल खेलों में आगेयुद्धवीर गज़ब का था अपना वीरलम्बे समय तक सिरमौर रहकरवायुसेना गौरव की लिखी तकदीरजैसी लगन से कर्त्तव्य निभाएउसका उदाहरण मिलता नहीं जांबाज़ दुनिया में होंगे बहुतदिलवाला जांबाज़ देखा नहींअर्जन सिंह जैसा योद्धा खिलाड़ीऔर नेकदिल इंसान देखा नहीं पैंसठ की जंग में रण कौशल दिखायापद्म विभूषण जैसा सम्मान पायासेवानिवृत होकर भी देश विदेश मेंआधिकारिक कौशल का लोहा मनवायास्विज़रलैंड केन्या दिल्ली कभी भीभूलेंगे तुम्हारी सेवा नहीं जांबाज़ दुनिया में होंगे बहुतदिलवाला जांबाज़ देखा नहींअर्जन सिंह जैसा योद्धा खिलाड़ीऔर नेकदिल इंसान देखा…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    नौकझोंक (NaukJhonk)

    नारी ऐसी होती हैनारी ऐसी होती हैशक करती है खुदमर्द को संग डुबोती हैनारी ऐसी होती हैनारी ऐसी होती है मर्द की फितरत होती हैनारी ऐसी होती है मर्द की फितरत होती हैघरवाली हो साथ नज़रबाहर की पे होती हैमर्द की फितरत होती है नारी ऐसी होती हैमर्द की फितरत होती है नारी ऐसी होती हैआदत मर्द की सारीपहले गलत बताती हैयह मत पहनो यह मतखाओ की रट लगाती हैबदल जाए मर्द तोआंसूओं से फर्श भिगोती हैनारी ऐसी होती है मर्द की फितरत होती हैनारी ऐसी होती है मर्द की फितरत होती हैघर में बकरी बाहरजाकर शेर हो जाता हैआँखें…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    इरादा (Iraada)

    चाल कछुए की चला हूँ जी हाँ, मालूम है मुझेरफ्ता रफ्ता ही सही मंज़िल पर पहुँच जाऊँगा ज़रूर कब कहा मैंने कि दर्द जहां के पी सकता हूँ मैंअपने बोलों से मगर कुछ ज़ख्म सहलाऊंगा ज़रूर नहीं कहता कि बनवा दूंगा मैं एक ताज महलताज इस दिल को बना तुम्हें इसमें सजाऊंगा ज़रूर हवा पानी के ज़हर से तुम्हारी हस्ती सलामत रहेतसव्वुर के लिए कुछ सवालात छोड़ जाऊंगा ज़रूर ज़लज़ले समन्दरों पर हाँ मैं नहीं ला सकतामार कर पथ्थर मगर चंद लहरें उठाऊंगा ज़रूर दम लिया है अभी ज़रा थका नहीं हूँ ना ही रुकूंगाहौसले बुलंद हैं मेरे मैं चाँद…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    अधजली लकड़ी सुलगती यादें (Adhjali Lakdi Sulagti Yaaden)

    गिरे मकान की मिटटी जब हटाई गयीलाश बचपन मेरे तह में दबी पायी गयीकर लो तैयारी दफ़्न कर दो बचपन मेरालाश कांधों पे जाती नहीं उठायी गयीगिरे मकान की मिटटी जब हटाई गयीलाश बचपन मेरे तह में दबी पायी गयी ये था चूल्हा जिस पर माँ पकाती थी रोटीअधजली लकड़ी सुलगाते यादें पायी गयीमाँ के आंचल से खेलता एक बच्चा मिलाबच्चे को जबरन माँ सुलाते हुए पायी गयी गिरे मकान की मिटटी जब हटाई गयीलाश बचपन मेरे तह में दबी पायी गयी सुलगी अंगीठी पर हाथ सेंकते बच्चे देखेपिता से कहानियां सुनती टोली पायी गयीबाल्टी के पानी में डूबे चंद…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    अलफ़ाज़ मेरे (Alfaaz Mere)

    अशआर लोग  मेरे पढ़ने लगे हैंदिल की आवाज़ से जुड़ने लगे हैंव्हाट्सऍप फेसबुक और यूट्यूब परदिन रात सब फॉलो करने लगे हैं कोई पढता नखरे से कोई चाहत सेजो भी पढ़े देते उसको ये राहत हैंआलम ये है की हद से भी ज्यादाबेक़रार  इनके लिए रहने लगे हैं अशआर  लोग  मेरे पढ़ने लगे  हैंदिल की आवाज़ से जुड़ने लगे हैं गैर भी पढ़ते हैं पढ़ते हैं अपने भीहकीकत है इनमें और बसते सपने भीदोस्त तो दोस्त हैं दुश्मन भी अब तोदिल के घाव इनसे भरने लगे हैं अशआर लोग अब मेरे पढ़ने लगे हैंदिल की आवाज़ से जुड़ने लगे हैं सपने…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    Confused

    पापा     मेरे     नब्बे    के   हो   गए   हैंमेच्योर    बहुत   समझदार   हो  गए हैंलगता  हैं   मैं  भी  उम्रदराज़ हो गया हूँसमझदार और   जिम्मेदार  हो   गया हूँकन्फूज़न   में   गिरफ्तार   हो  गया हूँसमझदार मैं हुआ हूँ या बूढ़ा हो गया हूँजिम्मेदार  हुआ  हूँ  या  बूढ़ा हो गया हूँ ट्रैफिक   रूल्स   का मैं  ध्यान रखता हूँसरकारी  संपत्ति  का  ख्याल  रखता हूँनागरिक   मैं   समझदार   हो   गया  हूँसमझदार  और   जिम्मेदार हो  गया हूँकन्फूज़न  में  गिरफ्तार   हो गया हूँसमझदार मैं हुआ हूँ या बूढ़ा हो गया हूँजिम्मेदार मैं हुआ हूँ या बूढ़ा हो गया हूँ सड़कों  पर   ओवरस्पीड  नहीं  चलताउकसाओ तो भी ओवरटेक नहीं…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    पूंजीवाद (Poonjiwaad)

    खाली पड़े मकान में जोकिराये के लिए था गया छोड़ारहने लगा उस मकान मेंदो पंछियों का एक जोड़ा किराया नहीं देते थे! रहने लगे वो प्यार मेंअपने छोटे से घर संसार मेंदाना चुगने बाहर जातेशाम हुए घर लौट आते वक्त गुजरा उन्हें साथ रहेचिड़िया ने दो अंडे दिएअण्डों को जब वे सेने लगेबच्चे सपनों में आने लगे वक्त और गुज़रा, देना ध्यानकिराये पर चढ़ गया मकानदो बच्चों का एक परिवारघर में आये किरायेदार वे किराया देते थे! नया परिवार जब रहने आयासाफ़ सफाई का दौर चलायापंछियों को डरा कर भगा दियाअण्डों को घर से हटा दिया दो पंछी जोड़े में…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    सर-ए-महफ़िल (Sar-E-Mahfil)

    तेरी   महफ़िल   में   आकर  देख लियामेहमां   सिर्फ   मैं ही   नहीं,  देख लियातेरी   महफ़िल   में   आकर  देख लिया जुबां   तो   पूछती   है हाल-ए-दिल मेरागर्मजोशी   में   नहीं वो बात, देख लियातेरी   महफ़िल   में   आकर  देख लिया जिन  आँखों  को मेरा इंतज़ार रहता थागैरों   को  करती रही तलाश,देख लियातेरी   महफ़िल   में   आकर  देख लिया मुस्कुरा कर मिले सर-ए-महफ़िल जनाबमेरे   सवालों पर  आये सवाल, देख लियातेरी   महफ़िल   में   आकर   देख  लिया तेरे वादे पे कि न बदलेंगे दिल क़यामत तकख्वाम   खां   कर  लिया ऐतबार, देख लियातेरी   महफ़िल   में    आकर    देख   लिया खामोशियाँ कहतीं हैं आमद है क़यामत कीबेरुखी ब  न   जाती  है …

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    नयन मल्हार (Nayan Malhaar)

    नीले   नीले   नैनों   में     बना    लूँ    ठिकानादिल   बार   बार   बसना  चाहे  इनमें दीवाना नैना नैनों से मिल गए नैनों की बतियाँ पढ़ गएनैना   नैनों  से  लागे अब  कुछ  न  सूझे आगेदिल   पे   जादू   कर   गया   नैनों का मिलानादिल   बार   बार   बसना   चाहे  इनमें दीवाना नीले   नीले   नैनों   में     बना     लूँ   ठिकानादिल   बार   बार   बसना  चाहे  इनमें दीवाना नैना हैं खोजते तुमको तुम नैनों का काजल होबुझ  जाते  हैं  ये  नैना  जब नैनों से ओझल होनैनों     का   काजल   न    नैनों   से     बहानादिल   बार   बार   बसना   चाहे  इनमें दीवाना नैना   करते   हैं   वादा   इन …

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    बेताल का सवाल (Betaal Ka Sawaal)

    रांझे  ने   हीर  को  पसंद   कियादिल   का   रिश्ता   बुलंद  कियादोनों   के   दिल  मिलने लगे जबदोनों   प्यार   में  पड़ने  लगे  जबअनहोनी     का     बादल    फूटाभाग्य   ने   अपनी   हीर  को लूटादुर्घटना   एक   घटी   एक   दिनहीर ने खो दी एकआँख उस दिनरांझे   को   वह   चाहती थी मगरकहना  बहुत कुछ चाहती थी परजब   रांझा   मिलने   को   आयाहीर   ने   अपना   चेहरा  छुपायाबोली   रांझे   अब    मत    आनाजाओ   एक  नयी दुनिया बसानामुझे   और  प्यार  को भूल जाओमैं  काबिल  नहीं  तुम्हारे,  जाओ रांझा   अपना    समझदार    थाहीर   के   हाल  से खबरदार थान सिर्फ  उसने हीर  को   छोड़ाउसके   घर  का   रास्ता   छोड़ाएक    नए …

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    खेला जीवन का (Khela Jeevan Ka)

    जीवन के सब हैं रंग निरालेअलग अलग मतवाले प्यारेबचपन जवानी और बुढ़ापाचलो ज़रा इनके संग हो लेंचलो जीवन का खेल खेलें चलो संजू खेलने  जाएँ हमचलो  जीवन का खेल खेलेंमैं  मम्मी तुम  पापा  बनकरघर  घर खेलें  बड़े बन जाएँखाना खाकर बाजार जाकरचलो हम तुम दोनों सो जाएँ सुनो डिअर सुनती हो प्लीजचलो  जीवन  का खेल  खेलेंतुम सोई कितनी खिलती होबस   ऐसे   ही    सोई  रहनाबाकी   सब   मैं   कर   लूंगातुम सिर्फ मेरी होकर रहना सुनो हेलो उठ जाओ प्लीजआओ जीवन का खेल खेलेंचाय तैयार है सुनते  हो जीचलो पीकर हम घूमने जाएँदिन ये फिर  नहीं  आएंगेचलो   सपनो  में  खो  जाएँ सुनो,  उठना  नहीं    है  क्याचलो …

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    वो शख्स आईने में (Wo Shakhs Aaeen Men)

    कम  बोलता  बहुत कम बोलता हैहर वक़्त वो हरदम  बोलता हैमगर जब भी साला मुँह खोलता हैमेरे  बारे में सब   गलत  बोलता हैवो शख्स आईने में सच नहीं बोलता है मैं जो हूँ मुझसे वो बिलकुल अलग हैखुद से जुदा मैं वो दिखता अलग हैमुझको मगर वो कुछ कम तोलता है कम  बोलता  बहुत कम बोलता हैहर वक़्त वो हरदम  बोलता हैमगर जब भी साला मुँह खोलता हैमेरे  बारे में सब   गलत  बोलता हैवो शख्स आईने में सच नहीं बोलता है छोटा  था मैं जब भी झूठ कहता थाबहादुर बच्चा मैं वो सहमा रहता थाआज  भी  कहाँ वो  बेहिचक बोलता है कम  बोलता  बहुत कम बोलता हैहर वक़्त…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    घनघोर बरसो (Ghanghor Barso)

    सावन के महीने में छत पर बूदें बरस रहीं थीऐसे बरसा सावन जैसे कृपा बरस रही थीभोर की थी छटा रात की कालिख घट रही थीमैं बारिश में नहायी जैसे कृपा बरस रही थी कहीं बूदों की टिप टिप कहीं पानी की कल कलकहीं कड़कती बिजली नभ में बादल की हलचलआपधापी अफरातफरी घनघोर बरस रही थीमैं बारिश में नहायी जैसे कृपा बरस रही थी बरखा ने मन बहलाया बचपन फिर से लौट आयायौवन में था बिछड़ गया कोई साथी याद आयापानी की शीतलता मन को भी तर कर रही थीमैं बारिश में नहायी जैसे कृपा बरस रही थी वह अहसास…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    सिया वन गमन (Siya Van Gaman)

    तीन   लोक   करें   शोक  चराचर  सृष्टि  समस्त लजाती हैरोक  लो चलकर  राम लखन संग जानकी वन को जाती हैहृदय में संताप करे प्रलाप राम  की सिया पिया मन वासी हैजा  नहीं  सकते  बेबस  हैं  श्रीराम राह में  मर्यादा  आती है सिया के देखो भाग लिखा है त्याग पिया संग वन वन भटकीपवित्र  होकर  भी  अग्नि  में जली आज फिर वन को चल दीलिए  राम  का  अंश  तज  रही  वंश विरह दुःख में भटकेगीमर्यादा  की  कितनी और  प्रभु  राम  वह  अग्नि  परीक्षा देगीमर्यादा  पुरुषोत्तम  के  किस  न्याय  की  यह  ऐसी  पाती  हैरोक  लो  चलकर  राम  लखन संग जानकी वन को जाती…