नहीं कहता कि तुम (Nahin Kahta Ki Tum)

मैं नहीं कहता कि तुम मुझे याद करोगे
आख़िर क्यों मेरे लिए वक़्त बर्बाद करोगे
कोशिश थी यही बस मेरी मुझे ऐसा लगता है
कि मुझे तुम बेहतर लहज़े में याद करोगे

तुम्हारे साथ था सबको नहीं पसंद था
लगता होगा कि मुझे खुद पर घमंड था
चलेगा अगर गिले शिकवे मेरे बाद करोगे
कोशिश थी यहीं बस मेरी मुझे ऐसा लगता है
कि मुझे तुम बेहतर लहज़े में याद करोगे

एक मकसद पूरा हुआ अगला की अब दरकार है
जिंदगी है एक सफर और जाना हमें उस पार है
आज मैं हूं कल तुम भी जनाब चल दोगे
कोशिश थी यही बस मेरी मुझे ऐसा लगता है
कि मुझे तुम बेहतर लहज़े में याद करोगे

इस महफ़िल में हमने एक अरसा गुज़ारा है
आज तक था मेरा कल से वक़्त तुम्हारा है
इल्म है कि मुझे तुम ना नज़रंदाज़ करोगे
कोशिश थी यही बस मेरी मुझे ऐसा लगता है
कि मुझे तुम बेहतर लहज़े में याद करोगे

मैं नहीं कहता कि तुम मुझे याद करोगे
आख़िर क्यों मेरे लिए वक़्त बर्बाद करोगे
कोशिश थी यही बस मेरी मुझे ऐसा लगता है
कि मुझे तुम बेहतर लहज़े में याद करोगे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *