हम-तुम (Ham-Tum)

हम तुम मिले भी तो
रेल की पटरियों के जैसे
कुछ वक़्त संग चले
फिर मुड़ गया सफर
चाहत के बाग़ वीरां हुए
हम मिल पाए न दूर हुए

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