बाप के रूपमें उसने उसे हमेशाअपनी इज़्ज़त पर खतरा समझाऔर कोशिशें की वह पैदा ही न हो भाई के रूप में उसने हमेशा उसेअपने से कमतर समझा और उसकेऊपर हज़ारों पाबंदियां लगा कर रखींउसके घूमने फिरने पढ़ने लिखनेऔर यहाँ तक कि उसके हसने पर भी परिवार और समाज कि रूढ़ियों औरपरम्पराओ को निभाने के लिए उसे हीहमेशा बलिदान देना पड़ता थाउसकी जगह या तो घर की रसोई में थीय फिर गाय भैंसों के तबले मेंअपनी किस्मत का गोबर ढोने के लिए जब बड़ी हुई गाँव के मनचलों के भेष मेंउसने उसे इतना सताया कि घरवालों नेउसे घर ही में कैद…
आज का पन्ना मैं पढ़कर सोया हूँसबक कौन सा कल पढ़ाएगी तूकिन नए लोगों से मैं कल मिलूंगाक्या नए तोहफे दे जायेगी तूऐ ज़िन्दगी मेरे कानों में कह देक्या खेल मुझे कल खिलाएगी तू मुकाम कोई ऊंचा हासिल करूँगाया कमाल कर के दिखाऊँगा मैंअपनी कहानी का हीरो बनूँगाया साइड हीरो रह जाऊंगा मैंबॉस से मेरे सिफारिश लगाकरमुझको प्रमोशन दिलाएगी तू ऐ ज़िन्दगी मेरे कानों में कह देक्या खेल मुझे कल खिलाएगी तू एक हमसफ़र की हमको चाहत हैदिन अब तनहा कटते नहीं हैंयार सब जब से सेटल हो गए हैंचेहरे भी सालों के दिखते नहीं हैंएक प्यारी लड़की से मुझको…
सच, सच तेरी मेरी सोच पे पड़ा एक पर्दा हैसच, झूठ को सच बताने की एक अदा हैवर्ना तेरा सच मेरे सच से अलहदा क्यों हैसच जो खुदा है तो दोनों का जुदा क्यों है हम दोनों आधे सच आधे झूठ के आदी हैंतेरा और मेरा दोनो का ही सच मियादी हैमैं एक झूठ हूँ और वज़ूद तेरा भी सच नहींमिट जाऊंगा मैं एक दिन रहेगा तू भी नहीं सूरज चाँद तारे धरती पहाड़ और ये समंदरआज सच हैं मगर नहीं है भरोसा कल परकहते हैं जब कहीं कुछ नहीं था तो सच थाजहाँ जो फानी है तो जहाँ से…
सुबह हमेशा की तरहमनमोहक और हवा ताज़ी थीमगर वह कमज़ोर दर्द सेबेइंतेहा परेशान और सदमे में थीजिस्म के एक एक हिस्से मेंजैसे आग लग रही थीसुबह के उजाले से कहीं गहराउसकी आखों में अँधेरा था जानवर बुद्धि थी इसलिएउसे समझ नहीं आ रहा थावह कुछ भी ठीक सेयाद नहीं कर पा रही थीयाद है तो बस इतना किअपने छोटे से बछड़े कीममता में डूबी सड़क परवह चली जा रही थी बेखबर आस पास इक्का दुक्का गाड़ियों कीआवाज़ें उसके कानों में पड़ती थींमगर उसका ध्यान बछड़े में ही थापता नहीं कैसी हालत में होगाउसकी तलाश में वह बेतहाशातेज़ क़दमों से जा…
ख्वामखां ही किसी से उलझते नहींमन किसी से भी मैला रखते नहींसाफ़ दिल है खरी बात करते हैं हमसिर्फ अपने ही आपे में रहते है हमदुनिया फिर भी सताये तो क्या कीजियेझूठी तोहमत लगाए तो क्या कीजिये दोस्त हैं दोस्ती का दम भरते हैं दोस्तजान से भी सगे अपने बनते हैं दोस्तमौके पे जब भी लेकिन ज़रुरत पड़ीपीछे के दरवाजे से खिसकते हैं दोस्तदोस्त ऐसे सताएं तो क्या कीजियेज़ख्म दिल पर चलाएं तो क्या कीजिये तुम जिओ और जीने दो हमको भी यारअपना तुमसे नहीं है कोई सरोकारहम जो बोलें तो आता नहीं है पसंदऔर न बोलें तो समझो हमें…
रात भर दुनिया का रंग मंचअँधेरे की कैद में सुनसान रहान शोर न संगीत न कलाकारचंदा तारों ने लाख कोशिशें कींअँधेरे को उजाले दिखाने कीमगर हर बार की तरहइस बार भी नाकाम ही रहे अरे देखो देखो ज़रा देखोअम्बर पर धीरे धीरे सुबह कीरौशनी गहराने लगी हैअँधेरे का पर्दा उठने लगा हैदिन के रंग मंच पर एकऔरनाटक बस शुरू होने ही वाला है***************************सुनिए! सुनिए! सुनिए!साहेबान कद्रदान भाईजान अब्बाजानसुनिए! सुनिए! सुनिए!सब कलाकार अपने अपनेकिरदारों को बखूबी निभाने कीतैयारियों में लग गए हैंसुनिए आज के नाटक कापिरोगराम सुनिएकोई अमीर बनेगा कोई गरीबकोई सेठ तो कोई साहूकारकोई बनेगा माँ बहन बेटी बेटाचाचा ताया…
तूने छलनी मेरे जिस्म को कर दियादर्द रग रग से ले रूह तक भर दियाजीना दुश्वार है दिल परेशान हैदूर नज़रों से मेरी क्यों जाता नहींदर्द सीने से मेरे क्यों जाता नहींमेहमाँ कब तक का है क्यों बताता नहींदर्द सीने से मेरे क्यों जाता नहीं एक अर्सा हुआ दिल पर ये बोझ लिएसाल बीते कई आहें भरते हुएजिनके कारण से मेहमान तू बन गयातुझको मुझसे मिला कर किनारे हुएनस नस दुखती है जब से तू पीछे पड़ाखीर किसी और की क्यों खाता नहींदर्द सीने से मेरे क्यों जाता नहीं तेरी सोहबत में मायूस रहता हूँ मैंदेख चेहरा जहाँ वाले हंसते…
कल की बारिश में हुई एक शरारत ने फिरदिल के वीरां तसव्वुर को आबाद कियाटूटी छतरी लिए बूंदों में भीगतीएक हसीना को अपने रूबरू ला दिया कल की बारिश में हुई एक शरारत ने फिरएक हसीना को अपने रूबरू ला दिया फिर वही रेशमी ज़ुल्फ़ों से बाराहाबेदिली से था पानी टपकता हुआफूल से गालों से फिर फिसलते हुएरुकने की कोशिशें पानी करता हुआ शाम रंगीन थी ज़िंदा तस्वीर थीदिल मचलने का मौसम बना ही दियाकल की बारिश में हुई एक शरारत ने फिरएक हसीना को अपने रूबरू ला दिया तेज बारिश की बूंदों से बचते हुएपास आ जाती थी वो…
निज दुःख तो देखे नहीं परसुख दुःख दे जायखुद को लाभ गिने नहीं ख़ुशी परायी सताय भारत भूमि धन्य है घर घर डाक्टर होयकोविड चिंता मर रहा असर काहे न होय शर्माजी अति व्यस्त हैं कहीं न मिलने जायदेखे लड़ाई पड़ोस में घण्टों देत बिताय दुश्मन मर्यादा भली करे न पीठ पै वारबिगरे काज हसे नहीं कहाँ सच्चा रिश्तेदार यार बुलावें प्रेम से कबहुँ तो घर आ जायकिसके भाग को रोयें हम पता बतावत नाय माँ के रहते करत हैं मामा मौसी लाड़माँ पीछे सुध लें नहीं भांजे भांजी कबाड़ प्रीतीभोज बसे प्रीत नहीं जलपान रहे नहीं पान‘अतिथि देवोभव’ का…
मिटटी में दबी गुठली में सेआम का एक नन्हा पौधादेख रहा था मुझे टुकुर टुकुरअलग से एक वीरान मेंमैंने कहा भाई तुम तो आम होयानी फलों के राजाफिर कैसे रहते हो तनहाइस खामोश से सुनसान में बड़ी मासूमियत से वह बोलामैं ख़ास था ही कबमेरी माँ भी आम थी मैं भी हूँऔर बड़ा होकर भीआम ही कहलाऊँगाजब फल लगेंगे तब भीमीठा ही सही आम ही रहूँगाऔर तू ज्यादा खुश मत होहम दोनों में ख़ास फर्क नहीं हैमैं आम हूँ तो तू आम आदमी हैकिस्मत हम दोनों की एक सी हैहम दोनों ही कहीं एकांत में पैदा हुएबड़े हुए भी तो…
हे ब्रह्मदेव मुझे दो वरदानहिरण्यकश्यपु को दो अमरत्व दानमेरा यदि हो मृत्युदातान हो कोई मनुष्य न कोई देवन निर्जीव कोई न ही सजीवघर के अंदर न बाहर हीन पुरुष कोई न हो स्त्रीन बारह मास में से कोई मासन पृथ्वी पर न ही आकाशन दिन के समय न ही रात्रिन अस्त्र से ही न कोई शस्त्रमृत्यु को मेरा न हो संज्ञानकृपा मुझ पर करो भगवान हे ब्रह्मदेव मुझे दो वरदानहिरण्यकश्यपु को अमरत्व दान नरसिंह अवतार में श्री हरि नेब्रह्मा के निभाए सब वरदानअभिमानी हिरण्यकश्यपु कोसुनाया यह दंड विधान न मैं हूँ मनुष्य न कोई देवनख मेरे सजीव न हैं निर्जीवमृत्यु…
बिना बेगम के बादशाहबहुत अकेला महसूस करता था बेगम का इंतकाल हुएबरसों बीत गए थेबादशाह का एक बेटा था, शादीशुदाजो बहु बेगम के इश्क़ मेंइस कदर गिरफ्तार थाकि ज़माने वाले उसेजोरू का गुलाम कहते थेबादशाह ने कई बार उसेसमझाने की कोशिश कीमगर नाकाम रहाबेटे की बेरुखी की वजह सेबादशाह और भी अकेला हो गया थाउसका गम बांटने वाला कोई न था एक रात पास की रियासत सेबेगम साहिबा तशरीफ़ लायीबेगम के साथ उसकासिपहसालार भी थाबेगम साहिबा बेवा थीऔर अकेली भी, बादशाह की तरहयानी जोरू के गुलाम केअब्बाजान की तरह बादशाह ने दिल खोल करबेगम का इस्तकबाल कियाबेगम को बादशाह की…
चाँद आज कुछ ठीक थाचांदनी के संग घर में मौजूद थाचेहरे पर चोटों के निशान लिएमायूस बैठा था मगर ठीक थाचाँद आज कुछ ठीक था कल की रात वह भूल न पायेगाएक आवारा बादलों का गिरोहन बिजली न गर्जना न बारिशअपने सभी काम छोड़आसमान में घूम रहा थापागल लुटेरों की तरह कोई और घर मिला नहीं तोउन्होंने चाँद के घर पर हीहमला बोल दियाचाँद जो कि कमज़ोर थाइधर उधर भाग रहा थाकभी खुद को कभीचांदनी को बचाने कीकोशिशें करता हुआफिर भी नाकाम रहा जालिम बादलों ने मगरकोई लिहाज नहीं कियाइस झपटमारी मेंचांदनी का तो पता नहींमगर चाँद को कई चोटें…
नए फूलों को सौंप चमन की ज़िम्मेवारीमाली कर लो नयी बसंत ऋतु की तैयारी कलियाँ हैं कोमल इनको भी खिलने दोबढ़ना सबका हक़ इन्हे भी तो बढ़ने दोस्वच्छंद हवा से मिलकर ये सुगन्धित होंगेशोभा चमन की रखने को अनुबंधित होंगेपूर्ण नहीं सम्पूर्ण होंगी आशाएं तुम्हारीमाली कर लो नयी बसंत ऋतु की तैयारी काँटों से भी वैर न रख उनका महत्त्व हैहितैषी पितृ सामान माँ जैसा मातृत्व हैअनुशासन भी सौंदर्य का अभिन्न अंग हैतभी तो फूलों के उपवन में कई रंग हैंकांटो पर दो छोड़ फूलों की पहरेदारीमाली कर लो नयी बसंत ऋतु की तैयारी देखो माली ऋतु बसंत उपवन से…
पिताजी बार बारकहते कहते मर गएप्रतिभाशाली बनो प्रतिभाशाली बनोप्रतिभाशाली बनो पिताजी मर गएपर उनके वे शब्द सदाउसके कानों में गूंजते रहे लेकिन जीवन में बार बारअसफल रहने पर जबयह सिद्ध हो गया किसफलता का प्रयास उसनेपुरे मन से नहीं किया थातो वह बैठ गया ठालीसुनने और सहने के लिएअपनों और गैरों केताने और गाली आखिर एक दिनएक उपाय मन में आयाऔर वह खुद के लिएएक लड़की तलाश आया अगले दिन पड़ोसन प्रतिभा कीछोटी बहन से ब्याह करघर ले आया औरबना लिया उसे घरवालीअब प्रतिभा थी उसकी सालीऔर वह भी हो गया था अबप्रतिभा-साली
मैया मोरी! ऑटोवाला मोहे न बिठायेआना घर मोहे इंद्रपुरी कहेइंद्रलोक को जाएमैया मोरी ऑटोवाला मोहे न बिठाये बस स्टॉप पर मैं तो खड़ी थीबस एकहु नहीं आय रही थीआप ही रोके खुद ही पूछेमैडम किधर रही जाएमैया मोरी! ऑटोवाला मोहे न बिठाये मैंने कही सुनसान जगह हैशाम भई मेट्रो तक छोड़ देबोलै रुपये दो सौ लगेंगेमीटर से नहीं जाएमैया मोरी! ऑटोवाला मोहे न बिठाये कर्कश स्वर में बनाये बतियाँघूर रही मोहे दोनों अखियांजियरा मोरा घबराय रहा हैअनहोनी न हो जाएमैया मोरी! ऑटोवाला मोहे न बिठाये का करूँ माँ अब कैसे आऊं100 नंबर या 1091 लगाऊंचिता घर की सताय रही हैकोई…
ये जो तेरी ज़ुल्फ़ बारहा पेशानी पर आ गिरती हैमालूम होता है गिलहरी कोई दाना तलाशती है मिल जाती हैं जो नज़रें तो झुक जाती हैं ये नज़रेंबचते ही नज़र हम पर क्यों टिक जाती हैं नज़रें बातों में तेरी शहद है और हसी बाकमालपल्लू जो सर पर ओढ़ लो हो जाओ बेमिसाल नीले अम्बर सी तेरी आँखें सादगी की तू मूरत हैशायद तुझे नहीं पता तू कितनी खूबसूरत है आती हो अकेले जाती हो अकेले वीरां हो या मेलेकोई हमसफ़र बना लो वर्ना मर जाओगी अकेले तेरी बेपरवाही पर दिल पहले ही था कुर्बानसर रख दिया है कांधे पे…
सोने को बेला मंगाऊं मेरे राजाबेला में खीर खवाऊं मेरे राजासोने को बेला मंगाऊं मेरे राजा खावत खावत जो प्यास लगेगीकोका कोला पिवाऊँ मेरे राजासोने को बेला मंगाऊं मेरे राजा खाय पी कै जब खेलन जाएगोचांदी को झूला झुलाऊँ मेरे राजासोने को बेला मंगाऊं मेरे राजा झूलत झूलत जब थक जाएगोडबल बेड पे सुवाऊँ मेरे राजासोने को बेला मंगाऊं मेरे राजा सोवत सोवत जो गर्मी लगेगीऐसी नयो लगवाऊं मेरे राजासोने को बेला मंगाऊं मेरे राजा ऐसी में तोय जो जाड़ो लगेगोमखमल रजाई उढ़ाऊँ मेरे राजासोने को बेला मंगाऊं मेरे राजा सिदोसी जब तू ड्यूटी पे जाएगोमारुती में छोड़ के आऊं…
ज़िंदा हो! तो ज़िन्दगी दिखनी चाहिएहोठो पर हर वक्त हंसी खिलनी चाहिएउतार फेंको चलो यह बुत सा चेहराअरे! दर्द को भी तो राहत मिलनी चाहिए मेहमान खास मेरे बनकरकभी आओ समां बदल जायेखूब जमेगी महफ़िल जबअशआर-ए-शरबत रंग लाये क्या रंग खिला मेरे शरबत कारंग फूलों के मिलाये हैंमन की बगिया को झकझोराघर की सिल पर पिसवाये हैं रंगों में होकर सराबोरचलो रंगत में हम खो जाएँ मेहमान खास मेरे बनकरकभी आओ समां बदल जायेखूब जमेगी महफ़िल जबअशआर-ए-शरबत रंग लाये मन की मधुमक्खी से कहकरमीठा शहद मंगाया हैलफ़्ज़ों की कसौटी पर तोलातब मीठा इसे बनाया है यह मिठास है शुगर फ्रीबेहिचक…