• ज़िन्दगी की सरसराहट...

    दिल की आवाज (Dil Ki Aawaaz)

    सुख के दिनों में जो दर्पण दिखाएरखे ज़मीन पर वह दिल की आवाज़ हैदुःख के समय में जो उम्मीद जगायेटूटने नहीं देती वह दिल की आवाज़ हैसंघर्ष में भी जो हाथ न छोड़ेभटकने नहीं देती वह दिल की आवाज़ है दर्पण दिखाए जो हाथ थामेगिरने न दे वो खुदा का पैगाम हैदिल की आवाज़ यानिखुदा की आवाज़ है लफ्ज सब मेरे भी दिल की आवाज़ हैंसुनो न सुनो तुम हम सुनाते रहेंगेभटकोगे गर या गिरने लगोगेहाथ थाम कर राह दिखाते रहेंगे दोस्त ये तुमको जगाते रहेंगेकदम दर कदम राहें दिखाते रहेंगे

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    तिलिस्म (Tilism)

    कुछ छिन रहा, है या कुछ बनने वाला हैकुछ घट रहा है या नया कुछ घटने वाला है हो चला है अब अंत  कलियुग काया कि है आरम्भ नए किसी युग का हमारी नादानियों का है लेखा जोखाया किया है हमने प्रकृति से कोई धोखा है परिणाम हमारे किसी जुल्म काया इंतजाम है किसी नए इल्म का वक़्त के हाथों में कैद नसीब इंसान का हुआ आज़ाद तो कहलायेगा ‘मर्द का बच्चा’वर्ना बन रहेगा टुकड़ा कब्रिस्तान का

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    जानलेवा (JaanLeva)

    दिल ने चाहे थे फुर्सत के रात दिनलम्बी मगर यह फुर्सत जानलेवा है दरवाजे पर जो देता है दस्तक बार बारसुना है वो मेहमाँ जानलेवा है पंछी नदिया पवन सब बहार खुश हैंसिर्फ इंसां का निकलना जानलेवा है मिलो, मगर फासले से अगर जरूरी हैकि साँसों की सरसराहट जानलेवा है भगाते भगाते कहाँ ले आई ज़िन्दगीजो पाया उसे छूना ही जानलेवा है

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    घर की बेटी (Ghar Ki Beti)

    खुद भूखी है परवाह नहींपरिवार को पहले खिलाती हैबच्चों की ख़ुशी में खुश होतीदुःख अपना नहीं बताती है सबसे जल्दी जगने वालीआखिर तक ही सो पाती हैघर की बेटी न जाने कबबेटी से माँ बन जाती है बचपन में गुड्डे गुड़ियों कोलोरी थपकी दे सुलाती थीकभी पापा की कभी भाई कीपल में मम्मा बन जाती थी सब पर स्नेह बरसाती परहक़ अपना नहीं जताती हैघर की बेटी जाने कबबेटी से माँ बन जाती है देवी है वह अन्नपूर्णाइस संसार की पालक हैबेटा जो घर का चिरागतो बेटी घर की रौनक है अपनी किस्मत वह संग लातीदो घर के भाग्य जगाती…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    अविरल बहना (Aviral Bahna)

    न बन जाना भीड़ का हिस्साजोखिम उठाने से डरना नहींसवाल खुद के इरादों पे करना नहींभरोसा रखना बन जाना चैतन्य का सूर्यकाट देना देना अंधेरों के परचल देना लिए नये सवेरे आँखों परबढ़ते रहना राहें धुंध भरी हैं बेशकहम साया हमराह नहीं हैहौसले भी मगर कम तो नहीं हैंपरवाह न करना सफल रहोगे शक नहींलक्ष्य सर्वदा साधे रखनादुआ यही है दुआ में रखनाअविरल बहनाबढ़ते रहनाबढ़ते रहना

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    अभी बाक़ी है (Abhi Baki Hai)

    तेरी नेमतों का क़र्ज़ उतारे बैठा हूँज़िन्दगी है तेरा इंतज़ार बैठा हूँ महक ज़रा तेरी साँसों कीआँखों की हया अभी बाक़ी हैकुछ रेशे तेरे दामन केमेरी पेशानी पर बाक़ी हैख्वाब न जो ताबीर बनेरानाई अभी भी बाक़ी हैदिल-ए-नादान बियांबां मेंरूह-ए-खलिश अभी बाक़ी हैतुम चाक जिगर डालो खंज़रकि इश्क़-ए-जुनूं अभी बाक़ी है

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    तजुर्बे के बागीचे से (Tazurbe Ke Baageeche Se)

    बदल रहा है मौसम मिज़ाज़ लोगों की तरहशायद हवाएं तेरे शहर से होकर गुज़री हैं ऐ तूफां तेरी ताक़त का गुमां रहने देएक टिमटिमाता दिया तुझे ठेंगा दिखा रहा है लाख अँधियाँ उजाड़ दें उम्मीद के दरख़्तमेरे हौसले फौलाद हैं बेदम न होंगे दिन  दिन इसी एहसास में गुज़रता हैकि वो दिन पलटकर फिर से आएंगे गीली हवाओं में अब सर्द महसूस होता हैकौन कम्बख्त मेरे जिस्म की गर्मी चुरा रहा है इन्हें चखकर देखो तो. मीठे हैं न !तजुर्बे के बागीचे से कुछ फल ताज़ा तोड़े हैं

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    अभय (Abhay)

    कम बोलता हूँ पुरज़ोर नहीं मैंअंतर्मुखी मगर कमज़ोर नहीं मैं ख़ामोशी खुदा की इबादत हैकम बोलना मेरी आदत हैदलालों की बस्ती का शोर नहीं मैं कम बोलता हूँ पुरज़ोर नहीं मैंअंतर्मुखी मगर कमज़ोर नहीं मैं आधा सच छुपाने के आदी हो तुम तोसमीकरण तुम्हारे मुबारक हों तुमकोसच्चाई है दिल में चोर नहीं मैं कम बोलता हूँ पुरज़ोर नहीं मैंअंतर्मुखी मगर कमज़ोर नहीं मैं माना अँधेरे का है रंग गहरातेवर भी अपना जुदा जो ठहरानिगल जाये तम ऐसी भोर नहीं मैं कम बोलता हूँ पुरज़ोर नहीं मैंअंतर्मुखी मगर कमज़ोर नहीं मैं ठोकर लगेगी परवाह नहीं हैगिरना है गिरकर उठना खुद ही…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    ग्रीष्म ऋतु (Greeshm Ritu)

    पावक दहकी क्षितिज क्षितिज मेंग्रीष्म ऋतू आयी यौवन परउष्मायी धरती निज उर मेंपावक दहकी क्षितिज क्षितिज में कुंदन बदन दमकती कायासुन्दर रूप है क्यों तमतमायायों रूठे हो क्यों बैठे होसूर्यदेव क्रोधित अम्बर मेंपावक दहकी क्षितिज क्षितिज में जल बिन ताल तलैया सारेकुंए बावड़ी सूखे नालेसूनी जलधारा बन बन मेंपावक दहकी क्षितिज क्षितिज में गर्म हवा की चुभन है पैनीघर बाहर चहुँ दिश बेचैनीबिजली गुल और ऐसी चुपअफरातफरी फैली जन जन मेंपावक दहकी क्षितिज क्षितिज में दूर तभी एक बादल गहरायासर्द हवा का झौंका सुहायासराबोर वृष्टि में धुल करप्रकृति हुई निर्मल कण कण मेंहर्ष अलौकिक क्षितिज क्षितिज में

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    Sweet Rejection

    मैं बरसाती सूखा नालातुम बाढ़ उफनती नदी प्रियेबेमेल हमारी जोड़ी कानामुमकिन है मिलन प्रिये तुम हॉटडॉग सी हॉट हॉटसंग मुज़रेल्ला की चटनी होमैं जली बेड़मी पूरी हूँजो खैरातों में बटनी होतुम पेट्रोल सी ज्वलनशीलमैं माचिस पूरी बुझी प्रियेबेमेल हमारी जोड़ी कानामुमकिन है मिलन प्रिये तुम कान्वेंट एजुकेटेडगिटपिट इंग्लिश बतियाती होग्रेजुएट हिंदी से मैंअंग्रेजी जिसे डराती होख्वाब तुम्हारे देखूं मैंनहीं ऐसी मेरी बिसात प्रियेबेमेल हमारी जोड़ी कानामुमकिन है मिलन प्रिये काया से तुम भरी पूरीशुष्कबदन बेचारा मैंतुम श्वेतवर्ण ज्यों दूध क्रीमहूँ चारकोल सा काला मैंफुट से तुम लोहा लेतीसंघर्ष मेरा इंचों से प्रियेबेमेल हमारी जोड़ी कानामुमकिन है मिलन प्रिये गाड़ी बंगले…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    पैग़ाम (Paighaam)

    गांव का पीपल जो था आशियाना परिंदों काजलाते थे लोग जिसके तले दुआओं के दिएएक बवंडर उठा वक्त की गोद से कहींलीलता उम्मीदें उजाड़ता बस्तियां तमाम आया शाख़ों से पत्ते गिरे हवाओं पर इलज़ाम आयामहकते चमन का कज़ाओं पर अंजाम आयाग़म-ए-फुरकत से होकर फ़ना ज़नाज़े मेंफिर कोई शायर बदनाम आया बेरुखी से नज़रें चुराते क्यों होबेदिली है कहो बहाने बनाते क्यों होज़ख्म भर जाएंगे दिन गुज़र ही जायेंगेमुस्कुराओ बहारों का है पैग़ाम आया वह चाँद को कहता था कभी रोटीआलम है कि कायनात भी लगे छोटीचाँद की तरह बना कभी बिगड़ा  है वोगलाया खुद को तो हासिल मुकाम पाया नज़र…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    द्रोणपुत्र बनाम द्रोणशिष्य (DornPutra Banaam DornShishy)

    एकलव्य होकर भी वह हो गया भव्यअश्वत्थामा होकर भी तुम भटक रहेमृत पराक्रमी वीर धनुर्धर एकलव्यतुम मृत्यु आलिंगन को हो तरस रहेकृष्ण के हाथों मृत्यु पा वह हुआ मुक्तमृत्यु उपेक्षित तुम हो वन वन भटक रहे गुरुशीर्ष के तुम सुपुत्रवह निरा अस्वीकृत द्रोणशिष्यअसंख्य व्यवधान सहेबल दे दिया अंगुष्ठ किसम्मान गुरु का प्रकट रहे गुरु-शिष्य परंपरा का वह हुआ गौरवपितृ मृत्यु का कारण बन तुम भटक रहे एकलव्य होकर भी वह हो गया भव्यअश्वत्थामा होकर भी तुम भटक रहेमृत पराक्रमी वीर धनुर्धर एकलव्यतुम मृत्यु आलिंगन को हो तरस रहेकृष्ण के हाथों मृत्यु पा वह हुआ मुक्तमृत्यु उपेक्षित तुम हो वन वन…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    जंग (Zung)

    गांव में मचा कोलाहल अखबारों में बनी सुर्खियांटीवी पर हुए चर्चे तमाम और बांटी गयीं बर्फियाँ फौजी का जंग में साहस भाई क़ाबिले तारीफ़ थाएक हाथ दो पैर गए बच गया मगर नसीब था मैं मिला था उस वीर से जोधपुर हस्पताल मेंव्हीलचेयर में सिमटा आधा सा अजीब हाल में कारगिल में लड़ा था जंग हुई भारी थीपत्नी और एक बेटी की जिम्मेदारी थी देश खड़ा साथ था मुआवज़े की बारी थीनिकले बारात फौजी की गांव में तैयारी थी दबे स्वर मगर ये भी थे : लाचार फौजी कहाँ जायेगा बाज़ारों मेंभाई के पैसे पर बंदरबांट चलेगा परिवारों में जब…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    Opportunity Cost

    जीवन की जब राह चुनी एक राह तब छोड़ी थीदोराहे पर खड़े हुए हुए एक राह चुनी एक छोड़ी थी अर्थशास्त्र में तो हम लाभ हानि तय कर पाते हैंजीवनशास्त्र में पर किंकर्तव्यविमूढ़ रह जाते है जीवनपथ में लोग मिले कुछ मित्र चुने हमसफ़र चुनेउनसे जुड़कर रिश्तों के नए बंधन हमने और बुने चुनते चुनते बुनते बुनते यह जीवन चक्र पलटता हैपहले बचपन यौवन फिर वृद्धावस्था में ढलता है क्या होता वे मिल जाते जो मित्र हमसफ़र नहीं चुनेरिश्ते जो हमसे छूट गए  बंधन जो हमने नहीं बुने जीवन शायद बेहतर होता मन मफ़िक रिश्ते होतेपल नफरत के कुछ कम…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    सौगंध (Saugandh)

    कद्र न हो कद्रदान न हों विचलित तुमको नहीं होना हैसौगंध तुम्हें कविता मेरी पथभ्रष्ट कतई नहीं होना है चलन में हैं वे रचनाएं गुणगान भ्रष्ट का करती हैंजाति धर्म में उलझाकर उन्माद भीड़ में भरती हैं दुष्प्रचार की कालिख में कलम को नहीं भिगोना हैसौगंध तुम्हें कविता मेरी पथभ्रष्ट कतई नहीं होना है सच्चाई तेरे साथ रहे जन कल्याण सदा मन मेंदेश प्रेम सबसे ऊपर भारत के जन हों वर्णन में मर्यादा के धागे को ही आशा में पिरोना हैसौगंध तुम्हें कविता मेरी पथभ्रष्ट कतई नहीं होना हैतुम कृष्ण जपो अल्लाह कहो राम भजो रहमान कहोगीता के श्लोक आयते…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    यार पुराने (Yaar Puraane)

    छेड़ गए थे कभी दिल के तार देखता हूँबिछड़ गए हैं अब जो यार देखता हूँ बेगाने शहरों से  अनजाने चेहरे थेअलग भाषा परंपरा रस्मों के पहरे थेतार मिले दिल के तो नज़दीक आ गएगांठ बंधी ऐसी कि सब रिश्ते भुला गएनिश्छल था बड़ा उनका प्यार देखता हूँबिछड़ गए हैं अब जो यार देखता हूँखाना पीना सोना और जगना संग यारों केसुख दुःख लड़ाई संग झगड़ा संग यारों केकुछ भी एक का नहीं साझा था सब कुछसाझे थे कपडे और बांटते थे सुख दुःखमीठी उस तक़रार का खुमार देखता हूँबिछड़ गए हैं अब जो यार देखता हूँ व्यस्तता में उलझे…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    Abort Abandon Retry

    आओ खेलो मेरे ज़ज़्बात से फिर से एक बारशिकवे शिकायतों का दौर चले फिर से एक बार Abort तुमने कर दिया Abandon मैं हो गयाRetry का बटन दबा दो फिर से एक बार वक्त की धुंध में गुम हुए तुम बटुए की तरहतोड़ डालो दिल कि जोड़ूँ टुकड़े फिर से एक बार हर बात पर याद आता है रूठ जाना तेरारूठो फिर मनाऊं तुम्हे फिर से एक बार मुहब्बत का था मैं सितारा कभी तुम माहताबबेवजह तारीफों के पुल बांधें फिर से एक बार जैसे हालात ने लिख डाली थी किस्मत अपनीउन लकीरों को मिटाकर देखें फिर से एक बार कह…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    बुलाओगे तो क्यों न आऊंगा (Bulaaoge To Kyon Na Aaunga)

    बीत गया मैं वह वक्त नहींजुबां से निकला शब्द नहींकमां से छूटा तीर भी नहींजो लौटकर न आ पाऊंगाबुलाओगे तो क्यों न आऊंगा! हर युग में मैं आया ही हूँसच्चे मन की पुकार परविपत्ति ग्रस्त संसार परधर्म पर हुए प्रहार परकैसे मौन रह पाऊंगाबुलाओगे तो क्यों न आऊंगा! मैंने रखा है सदा मानद्रौपदी के क्रंदन कामीरा के प्रणय बंधन काविदुर के अभिनन्दन कापुकार देखो! रह न पाऊंगाबुलाओगे तो क्यों न आऊंगा प्रीत को पहचानता हूँसर्वस्व अपना मानता हूँकौन मेरा! है मैं जानता हूँवचन निश्चय ही निभाऊंगाबुलाकर देखो मैं आ जाऊंगा!

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    पंचम अलाप लगाओ (Pancham Alaap Lagaao)

    मञ्जूषा तुम गाओनए तराने फिर से छेड़ोसुर कोई नया लगाओमञ्जूषा तुम गाओ याद करो जब तुम गाती थीमन की बगिया खिल जाती थीगीत मधुर सुनने को जबबहती हवा भी थम जाती थीराग रंग बरसाओमञ्जूषा तुम गाओ व्यस्त तुम्हारा जीवन मानाहै अभाव समय का जानाफिर भी अपनी कला की खातिरसुनो! समय अवश्य बचानापंचम अलाप लगाओमञ्जूषा तुम गाओ श्रोताओं को न तरसाओचलो फिर से इतिहास रचाओ‘दीपक राग मल्हार भैरवीसुर के रंग में रम जाओइश्वर का वरदान हैयूँ न इसे गंवाओमञ्जूषा तुम गाओ वैष्णवी का ध्यान लगाकरनए विलास के गीत सजाओसरगम की लड़ियाँ बिखराकरआशा के नए गीत सजाओसाहिल पर छा जाओमञ्जूषा तुम गाओ