• ज़िन्दगी की सरसराहट...

    आर्यवर्त की प्रतिभा (Aaryvart Ki Pratibha)

    छोटी उम्र में सब बच्चे प्रतिभाशाली लगते हैंअपनी चतुराई से वे मुश्किल करतब करते हैंमगर बड़े होकर वे ही नौकरी ढूढ़ते रहते हैंअपनों के और गैरों के सबके ताने सहते हैंयह सिस्टम की नाकामी या कर्मों का लेखा हैआर्यवर्त में प्रतिभा को तिल तिल मरते देखा है घुट घुट कर सिसक सिसक चुप आहें भरते देखा हैआर्यवर्त में प्रतिभा को तिल तिल मरते देखा है विद्वान् कह गए आवश्यकता आविष्कार की जननी हैअसलियत में आवश्यकता प्रतिभा को छलनी करती हैकितने सपने कितने अरमान रोज़ यहाँ कुचले जातेसंग अपनों के तंज़ गहरे और गहरे होते जातेयह सिस्टम की नाकामी या किस्मत…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    एक पिता की अभिलाषा (Ek Pita Ki Abhilaashaa)

    इतनी प्रतिभा न दो प्रभु स्टार मिलेनियम बन जाऊंबेटा रह जाये अभिषेक मैं अमिताभ बच्चन हो जाऊंसुन लो अरज मेरी यह भगवन बार बार मैं दोहराऊंप्रतिभा ऐसी नहीं चाहिए अमिताभ बच्चन हो जाऊंइतनी प्रतिभा न दो प्रभु स्टार मिलेनियम बन जाऊंबेटा रह जाये अभिषेक मैं अमिताभ बच्चन हो जाऊं बेटा  होवे   सनी   देओल  जो मैं  धर्मेंदर बन जाऊंसुपरस्टार कहलाये  वो  चाहे कलाकार मैं हो जाऊंगुण   कुणाल   के   मत देना  गोस्वामी न रह जाऊंसूरज भारत का डूबे मैं सहन कतई न कर पाऊं सुन लो अरज मेरी यह भगवन बार बार मैं दोहराऊंप्रतिभा ऐसी नहीं चाहिए अमिताभ बच्चन हो जाऊंइतनी प्रतिभा न दो प्रभु…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    The monsoon song

    Fly  away  Fly  away  Fly  awayFly  away  Fly  away  Fly  away Let’s   begin   a   game  of  loveLet’s   play   a   game   of   love ऐसे   मेरी   साँसों   में   बस   गए  हो  तुमजैसे जलती धरती पर बारिश की रिमझिम Let’s   taste the fruit of  loveLet’s   taste the fruit of  love नींद   मेरी   चैन   मेरा   ले   गए हो तुमजाने   क्या   जादू   सा  कर गए हो तुम I  believe in love You believe in loveWe believe in love The world is in love धड़कन  पर  ख़्वाबों पर छा गए हो तुमदिल  की  सूनी  बस्ती  बसा  गए हो तुम I  am lost in love You are…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    वो घर जो छोड़ दिया (Wo Ghar Jo Chhod Gaya)

    वो घर जो छोड़ दिया उसपे अब इख्तियार नहींमगर  कहें  किस  तरह  तुमसे  हमें  प्यार  नहींवो घर जो छोड़ दिया उसपे अब इख्तियार नहीं हर  एक  वार  पे  घर  टूटा  दर-ओ-दीवार गिरेरूह तक काँप गयी ज़ख्म-ऐ-दिल  बह  निकलेमैं  गुनहगार  सही  अहल-ए-दिल  बेजार  सहीमगर  कहें  किस  तरह  तुमसे  हमें  प्यार नहीं वो घर जो छोड़ दिया उसपे अब इख्तियार नहींमगर  कहें  किस  तरह  तुमसे  हमें  प्यार  नहींवो घर जो छोड़ दिया उसपे अब इख्तियार नहीं तिनका   तिनका टुकड़ा  टुकड़ा  घर बनाया थारेशा   रेशा  खुशियां  बुनकर  जहाँ  बसाया   थातुम चली गयी भटकती रूह रही मैं बेकरार नहींमगर  कहें  किस  तरह   तुमसे  हमें …

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    मिस्त्री की ललकार (Mistree Ki Lalkaar)

    ऊंची छत पर शान से गर्दन अकड़ा कर घूमने वाले पंखेबांस की सीढ़ी पर चढ़ मैं तेरे सामने हूँ बता क्या कर लेगाऔज़ार मेरे पास हैं औकात मेरी ख़ास हैयह मज़दूर का हाथ है कातिया बता खोल डालूं तुझे होंगे तेरे भाई लोग कूलर फ्रिज ऐसी वग़ैरहडर बिजली का न दिखा मुझे कोई फर्क नहीं पड़तासर पर अल्लाह का हाथ है बिल्ला 786 मेरे पास हैभेजा फिर गया तो सबके बीच से उड़ा ले जाऊंगा तुझे Don’t Spin So Proud, Ceiling Fan! Up there you whirl, with your neck stiff high,Acting like the king of the damn blue sky. But…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    पापा के पोते की गर्लफ्रेंड (Papa Ke Pote Ki Girlfriend)

    पापा ने थी ज़िद पकड़ी जायेंगे वो अस्पतालजाकर पूछेंगे खुद बीमार पोते का हाल चाल बेटा बोला पापा मैं भी साथ चल सकता हूँडांट दिया पापा ने कहा अकेला जा सकता हूँ अकेला ही जाऊंगा पोते से मिल आऊंगारस्ते से दवाईयां और सामान भी ले आऊंगा पापा चले गए अस्पताल देखने पोते का हालवार्ड के भीतर पहुँचते ही पर हुआ बवाल पोते के कमरे से एक कन्या निकल रही थीदेख पापा की आँखें चिंगारी उगल रही थी पापा ने कन्या को कन्या ने पापा को देखाकन्या ने रस्ते को और पापा ने पोते को देखा पोता घबरायाा बोला दादू अभी…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    पापा मुझको बच्चा समझते हैं (Papa Mujhko Bachcha Samajhte Hain)

    दावा वो करते हैं कि सब समझते हैंपापा अब तक मुझको बच्चा समझते हैंमेरी सलाह अनुभव की ठोकर पर रखते हैंपापा अब तक मुझको बच्चों में गिनते हैं एडवाइस के लिए वो मुझको बुलाते हैंयंग सोच को हर काम में आज़माते हैंपर जब मैं अपने दिल की बात रखता हूँ‘तुम क्या जानो’ कहकर मनमर्जी करते हैं बोलूं तो ‘बहस नहीं’ कहकर चुप करते हैंचुप रहूं अगर तो भी पारा हाई करते हैंदावा वो करते हैं कि सब समझते हैंपापा अब तक मुझको बच्चा समझते हैं बड़ा हो गया हूँ पर फिर भी डरते हैंछोटे बच्चों के जैसी केयर करते हैंजॉब…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    बेटा दूर जाने लगा है (Beta Door Jaane Laga Hai)

    चोट लगी ऊँगली दिखाता था मुझकोबातें सब दिल की बताता था मुझकोज़ख्म ज़िन्दगी के अब छुपाने लगा हैबेटा अब दूर मुझसे जाने लगा है गले लगकर अपनी मांगें मनवाता थाफरमाइशों से अपनी चीज़ें मंगवाता थासंकोच में अब मन छुपाने लगा हैबेटा अब दूर मुझसे जाने लगा है दुनिया सारी जिसकी मुझमें समायी थीबेटे से अधिक कहीं यारी निभाई थीफर्क अपनी दोस्ती में आने लगा हैबेटा अब दूर मुझसे जाने लगा है शक्तिमान था उसका हल्क था मैं तोहीरो था जिसका आईन्स्टीन था मैं तोजीरो का फर्क अब मुझे बताने लगा हैबेटा अब दूर मुझसे जाने लगा है मोबाइल पर यारों…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    स्कूल की यादें (School Ki Yaaden)

    यूँ तो ज़िन्दगी पग पग पर सिखाती हैयाद स्कूल की मगर आज भी आती हैबचपन के दिन फिर से मोड़ लाती हैयाद स्कूल की जब जब भी आती है सरकारी स्कूल के वो लम्बे गलियारेप्लेग्राउंड वो क्लासरूम सब हमारेप्रिन्सी का केबिन स्टाफ रूम कैंटीनकई साल अपने जहाँ गुजरे बेहतरीन वक्त गुज़रा ज़िन्दगी अब भी लुभाती हैयाद स्कूल की मगर आज भी आती हैबचपन के दिन फिर से मोड़ लाती हैयाद स्कूल की जब जब भी आती है पीछे की बेंच के लिए दोस्तों से झगड़ाकहीं खींचातानी पेन पेन्सिल का लफड़ाबिना बात क्लास में शोरगुल मचानाटीचर पर कागज़ के राकेट उड़ाना…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    लॉकडाऊन के बाद (Lockdown Ke Baad)

    पैंट पहना तो आंसू भर आयेमुद्दतें हो गयीं है ठुकराएजिया न लगे क्या करें हायलॉकडाउन से हम उकताए निक्कर टी- शर्ट चप्पल में गुजरामुँह पर लंगोटी कसे हुए गुजरावक्त भुला नहाये न नहायेपैंट पहना तो आंसू भर आयेलॉकडाउन से हम उकताए शर्ट हसरत से तकती थी हमकोबेल्ट जूते बुलाते थे हमकोएक अरसा हुआ बाल कटायेपैंट पहना तो आंसू भर आयेलॉकडाउन से हम उकताए सूट करता नहीं सूट बिलकुलपहना उसको बदन हुआ व्याकुलपेट निकला सब कपडे कसायेपैंट पहना तो आंसू भर आये गाड़ी खड़ी जैसे दूध बिन भैंससड़कों पर जो लगाती थी रेसउस पर जाते हैं कपडे सुखायेपैंट पहना तो आंसू…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    बदलाव बस जुआ है (Badlaav Ek Jua Hai)

    बदलाव बस एक जुआ हैअनिश्चितता का अँधा कुआँ है नए को पकड़ो पुराना छूटेपुराना पकड़ो नया जा फिसले नए में निहित आकर्षणपुराने में रमता है दर्शन नया नवीनता का नशापुराने से जुड़ा है राब्ता नए में असफलता का डरपुराने पर कमज़ोरी की नज़र बहुमूल्य होते हैं: पुराने यार पुराना प्यारपुराने गीत पुराने मीतपुराना घी पुराना चावलपुरानी शराब पुरानी किताब पर आकर्षित करते हैं: नए कपडे नए रिश्तेनए तेवर नए जेवरनयी गाडी नयी सवारीनया घर नया हमसफर बहुत सताते हैंपुराना रोग पुरानी रंजिशमगर काटते हैं:नए जूते नए कुत्ते समझ नहीं आताकिसे सहेजें किसको छोड़ेंनए पुराने दोनों के हैंअल्हैदा चमक और जोखिम…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    विस्फोट (Visphot)

    मैं तो मासूम थी, नामालूम थी,बेचारी, भूखी—मैं एक माँ थी। छल-कपट से मैं थी अनजान,बड़े पेट की भूख से परेशान।झूठे सत्कार पर यक़ीन किया,जो परोसा गया, स्वीकार किया। मैं तो मासूम थी, नामालूम थी,बेचारी, भूखी—मैं एक माँ थी। हम हैं जानवर, हम ऐसे तो हैं—धोखे पर भी जान वार देते हैं।आधा सच हम नहीं जानते हैं,साँसों में ज़हर नहीं पालते हैं। मैं तो मासूम थी, नामालूम थी,बेचारी, भूखी—मैं एक माँ थी। मेरी मौत का तमाशा बना लो,इस लाश से भी पैसे कमा लो।झूठे आँसू मीडिया में बहाकर,मुद्दा बनाकर वोट हथिया लो। मैं तो मासूम थी, नामालूम थी,बेचारी, भूखी—मैं एक माँ…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    कैसे छोड़ दूँ (Kiase Chhod Dun)

    तुम एक सुबह छोड़ गयी मैंने सहा कुछ न कहावो कहते हैं घर अब पुराना हुआ छोड़ दोक्या कहती हो छोड़ दूँ ?याद है घर की दहलीज़ परहमने साथ रखे थे कदमपैरों के निशान आज भी मौजूद हैंकैसे छोड़ दूँ?आँधियों से गिरती कच्ची दीवारों को जो पूरी रात थामा थामिटटी में पसीने की महक आज भी कायम है, कैसे छोड़ दूँ ?वो जगह जहाँ तुम जलाया करती थी भक्ति का दिया रोज़उसकी लौ की कालिख अब तक वहां छपी है, कैसे छोड़ दूँ ?घर की सीढ़ियों से देखे थे जो आसमान से ऊँचे ख्वाबमेरी रातों में उन ख्वाबों की सदा…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    पानी पानी (Pani Pani)

    पानी पानी कैसा पानी खारा पानी मीठा पानीगहरा पानी उथला पानी ठहरा पानी बहता पानी सावन के महीने मैं कैसे रिमझिम बूंद बरसता पानीफूलों की पंखुड़ियों से बनकर ओस सरकता पानी पानी की महिमा अपार तुम्हें सुनाएँ अमृतवाणीअनुभव अपना क्योंकि घाट घाट का पिया है पानी मिले खबर जो कोई ख़ुशी की छलकातीं आँखें पानीलगती चोट कलेजे पर अश्रु बन बह जाता पानी लज्जित हो किसी बात पर घड़ों है पड़ जाता पानीनिर्लज हो इन्सान तो आँखों का मर जाता पानी गुत्थी अगर सुलझ जाये दूध का दूध पानी का पानीपकड़ा जाये रंगे हाथ तो होना पड़ जाये पानी पानी…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    पूर्वयोद्धा(Veteran)

    घर बैठुंगा कल से शायर हो जाऊँगायारो मैं कल से रिटायर हो जाऊंगा ऑफिस ने रुतबा आत्मसम्मान दियारूपया प्रतिष्ठा और बहुत ज्ञान दियाबिन हवा गाड़ी का टायर हो जाऊंगायारो मैं कल से रिटायर हो जाऊंगा अधिकांश जीवन यहाँ पर बितायाटारगेट भी जीते मित्रधर्म भी निभायागीली लकड़ियों की फायर हो जाऊंगायारो मैं कल से रिटायर हो जाऊंगा याद आते हैं दिन जब मौज मनाते थेकाम के संग संग जोक भी सुनाते थेएसीआर ख़तम अब सटायर हो जाऊंगायारो मैं कल से रिटायर हो जाऊंगा साथ रहे आप मैं बस शुक्रिया कहूंगानयी राह चला हूँ अब अलविदा कहूंगाफाइलों मैं बंद दिलों से बाहर…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    बेफिक्र चल (Befikr Chal)

    रुख-ए-हवाओं की कहाँ परवाह किया करते हैंबाज़ परिंदे हौसलों से उड़ान लिया करते हैं नेकी बदी के फलसफे पर वक़्त यूँ जाया न करकायनात-ए-रहनुमा एक अकेला तू नहीं गुनहगार तो वो है  जिसका जुर्म साबित हो गयापलट कर देखो तो हर कालीन नीचे मैला है दुश्मनों के तंज़ का न गौर कर जाने भी देमक्खियॉं आने से हाथी फासला देते नहीं सोचता ही मैं रहा वह उम्र पूरी जी गयाहर फ़िक्र को धुँए में उड़ाता चला गया शिकस्ता के साथ रहती ठोकरें रुसवाइयाँमंज़िलों के पार अक्सर तोहमतें मिट जाती है नाम होगा दाम भी शोहरतें और हैसियतइनके आगे तो हुज़ूर सरकारें…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    माँ तुमको क्या संज्ञा दूँ (Maa Tumko Kya Sangya Dun)

    जग से तुमने ही मिलवायाकौन है क्या सब मुझे बतायापरमेश्वर का रूप तुझे माँदेख समझ में आया मेरी यह सामर्थ्य कहाँकि तेरा चरित बता दूँमाँ तुमको क्या संज्ञा दूँ जाने कौन सा ज्ञान थाया कोई जादू टोना थाबिन बोले क्या मुझे चाहिएतुमको समझ में आता था ज्ञात नहींअब तक कैसेमैं झूठे बात बना दूँमाँ तुमको क्या संज्ञा दूँ मेरी ख़ुशी में खुश हो जातीमेरे दुःख में मेरे रो जातीछोटी छोटी जीत में मेरीतू कितना इतराती कोई नहीं है साथी जिसकोदिल के जख्म दिखा दूँमाँ तुमको क्या संज्ञा दूँ प्यार की कच्ची डोर सेकैसे घर को बांधे रखतीहम सब की माँ बागडोरतू…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    भाभीजी (Bhaabhiji)

    कहाँ गए वो दिन जब यार फ़ोन लगाते थेवीकेंड पर साथ चाय का निमंत्रण दे जाते थे प्लानिंग में ही बस बाकी वक्त बीत जाता थाभाभीजी की याद में सप्ताह यूँ बीत जाता था उजले कपड़ों में सज आईने को लजाते थेसमय से पहले ही यार की घंटी जा बजाते थे सजी संवरी भाभीजी का यूँ पानी लेकर आनाठन्डे के साथ उनका स्माइल परोस जाना कहते सुनते बातों में वक़्त यूँ निकल जाता थाचाय-पकोड़े और फिर से चाय का दौर चल जाता था ‘आपने तो कुछ लिया नहीं, लीजिये न भाईजान’जादुई शब्दों पर होते कई डाइट प्लान क़ुर्बान मिसेज की…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    घर (Ghar)

    ईंट गारे पत्थरों से तो मकां बना करते है, घर नहीं खिलता बचपन, जवानी की महकऔर छाँव बुढ़ापे की अगर शामिल नहीं खिड़कियां और रोशनदान कहाँ खुद से झांकते हैनज़ारे बेजां हैं अगर शोख नज़रें शामिल नहीं सोफे, बिस्तरे, गद्दे नींद इनकी कहाँ मोहताज़ हैबेमतलब सब हैं अगर नींद-ओ-ख्वाब शामिल नहीं बैठकें बन जाती हैं पर सजती मेहमानों से हैबेमायने हैं हुज़ूर  गर दौर-ऐ-बैठक शामिल नहीं सीढ़ियां ज़रूरी हैं ऊपर जाने के लिए मगरकामयाबी बेमतलब है अगर पसीना शामिल नहीं तुम नहीं, तो मैं नहीं होगा मकां भी घर नहींसंग अपने घर में खुशियां हों अगर शामिल नहीं Hoe Sweet…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    लाहौल वला कूव्वत

    सदक़े ऐ अनजानी रूह इंसां को डरा दियामंगल विजयी को तूने घर में पनाह दिया भागा फिरता था मतवाला अनजाने पथ परवर्तमान को रोंदा भविष्य के हाथों बिक करतीन वक़्त की रोटी दो कपड़ों में चुका दिया छोटे बड़े का फर्क था भाई भाई का दुश्मनदुनिया बनी जंग का मैदां हर सू बस अनबनइंसां को मिलजुल कर तूने जीना सिखा दिया सेवा भाव से संकट में एक दूजे को थाम लियादेर सही, मानव ने जीवन सत्य को जान लियापढ़ लिख कर न समझ   तूने सिखा दिया