• ज़िन्दगी की सरसराहट...

    आभार (Aabhaar)

    तेरे आथित्य का मित्र मेरे आभार व्यक्त करता हूँमैं कृतज्ञ हूँ ह्रदय से निज भाव व्यक्त करता हूँ तुमने जो भी मान दिया आतिथ्य निभायामन का कोना छूकर ह्रदय में स्थान बनायाअंतर्मन से में अपने उदगार व्यक्त करता हूँमैं कृतज्ञ हूँ ह्रदय से निज भाव व्यक्त करता हूँ तेरे संग संग गिरना उठना चलना सीखातेरे विश्वास पे कर विश्वास संभालना सीखाअपने जीवन का मैं सार व्यक्त करता हूँमैं कृतज्ञ हूँ ह्रदय से निज भाव व्यक्त करता हूँ कालांतर में विलग हुए हम बिछड़ गए थेसमय के अजगर हम दोनों को निगल गए थेअब जो मिले हैं प्रभु का गुणगान व्यक्त…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    ख़फ़ा वो ख़फ़ा हम (Khafa Wo Khafa Ham)

    कुछ  गलत हम हुए कुछ अंदाज़ गलत हो गएहसरतें  जब   टूटी   अलफ़ाज़   गलत  हो  गएरफ्ता-  रफ्ता  दरमियाँ   यूँ   फ़ासले  बढ़ते गएएहले सफ़र जो थे हमसफ़र अजनबी से हो गए ख्वाब थे  जिनके  सजाये भूल अपनी चाँद रातेंखामोश हैं अब जिनकी ख़तम होती थी न बातेंबस   पशेमा   ज़िन्दगी  है  और घबराएं से हमउनकी   आमद  ढूंढते  है मुन्तज़िर हम हो गए कैसे   उनका   हाल   पूछे   रूबरू   कैसे रहेरूठ   बैठे हैं  वो  हमसे  और ख़फ़ा कैसे करेंदिल मगर कम्बख्त नाज़ुक की यही है तिश्नगीवक़्त के धुंधले सफ़र में फ़िर मिले जो खो गये वक़्त   बीता  उम्र   गुज़री   मिट गयी यादें सभीज़ख्म   अपनों  से …

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    चले आओ रेणुका जी (Chale Aao Renukaji)

    धरती पर एक स्वर्ग का टुकड़ा चाहो जो देखना जीइस छुट्टी में घर मत बैठो चले आओ रेणुका जीदेवभूमि हिमाचल बसें परशुराम की माता जीतीर्थ स्थल माता का नाम है जिनका रेणुका जी दिल्ली से अंबाला पहुंचो जाओ फिर नारायणगढ़नाहन से होकर करना पड़ेगा आगे तीर्थ का सफरताज़ी हवा मनमोहक नज़ारे हर लेंगे चेतना जीइस छुट्टी में घर मत बैठो चले आओ रेणुका जी धरती पर एक स्वर्ग का टुकड़ा चाहो जो देखना जीइस छुट्टी में घर मत बैठो चले आओ रेणुका जीदेवभूमि हिमाचल बसें परशुराम की माता जीतीर्थ स्थल माता का नाम है जिनका रेणुका जी रात को सो…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    मेरी कविता (Meri Kavita)

    भावों की गीली मिटटी में फिर खिल उठी निराली कवितानवजीवन की नव उमंग भर नित नव स्वप्न दिखाती कविता सोंधी मिटटी की सुगंध ले रंग हिना से लाई कविताओस की बूंदों सी शीतल बन मन शीतल कर आई कविता सूरज की पहली किरणों से मांग उजाले लायी कवितातपती धरती के आँचल पर बदली सी घिर आयी कविता वर्षा की रिमझिम बूंदों में घंटों खूब नहाई कविताआम के बागों में जा बैठी अमरस भर भर लाई कविता शब्द के मोती शब्द से जोड़े माला नयी पिरोये कविताशिशु की सी मुस्कान बिखेरे कान्हा सम मन मोहे कविता फूलों से श्रृंगार चुराया लो…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    खालीपन (Khalipan)

    जान देकर भी न हासिल हुए रिश्तेक़ब्र उसकी कहीं बेहतर निकली मददगार सभी कुछ दूरी पर ही थेजिस जगह बेचारे की साँसें निकली हाल-ए-दिल किसी से कह न सकाभूलने की कोशिशें नाहक़ निकली क्या लगाते दाम उसके पसीने काआखिरी वक्त जब दुआ न निकली चला गया वो मिट गया नामोनिशांबातों में से मगर कई बातें निकली बंद कमरे में दम घोट गया खालीपनभीड़ उमड़ पड़ी जब अर्थी निकली

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    चापलूस (Chaaploos)

    तारीफों के पुल पर मुझको कितना रोज़ चढ़ाते होपरिचय मुझसे मेरा ही तुम हर दिन नया कराते होसुध बुध मेरी खो जाती है झाड़ पर जब बैठाते होऐ चापलूस एम्प्लॉई मेरे तुम यह कैसे कर पाते हो यस सर और बस सॉरी सर हर बात पे ओके सरव्यस्त दिखाते खुद को करते काम नहीं दिनभरऑफिस के काम से जाते पर सब काम बनाते होऐ चापलूस एम्प्लॉई मेरे तुम यह कैसे कर पाते हो ऊँगली छोटी पकड़ा दी तो तुमने ली है बाजू धरलिफ्ट ज़रा जो दे दी तो लगे हो नाचने सर परएक काम मेरा करते दस अपने निपटाते होऐ…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    माँ मुझे बड़ा नहीं होना है (Maa Mujhe Bada Nahi Hona Hai)

    माँ मुझ पर उपकार तुम्हारा जग में जो मुझको लाईममता की छाया में रखकर दुनिया मेरी स्वर्ग बनाईबस इतनी अभिलाषाहै माँ दूर तुमसे नहीं होना हैतेरी छाया में रहना है मुझे बड़ा कभी नहीं होना है खेल खिलौने तुमसे मेरे हर पल तेरे दम से मस्तीतेरी आँखों के काजल से ममता मुझ पर रोज़ बरसतीतेरे पल्लू का छोर पकड़ समय से छुप कर रहना हैतेरी छाया में रहना है मुझे बड़ा कभी नहीं होना है कभी छिप जाऊं तुम खोजो मैं ढूंढूं तुम छुप जाओपापा से कहकर मुझको टॉफी गुब्बारे दिलवाओतेरा राजदुलारा हूँ मैं साथ संग सदा तेरे रहना हैतेरी…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    रूबरू (Rubaroo)

    रूबरू हो तुम एहसास जानलेवा हैछू लिया तुमने क़यामत हो गयी है शब्-ए-दीदार है हटती नहीं निगाहेंकहीं खो न दें तुम्हें पत्थर हो गयी हैं आपके ख़यालों में गुज़रती हैं शामेंख़्वाब-ओ-तस्सवुर में सुलह हो गयी है ज़माने से आशना हैं पर डरता है दिलअब छुपाए न बने मुश्किल हो गयी है सर-ए- महफ़िल तलाश है किसकीऔर किसकी नज़रें कायल हो गयी हैं मेरे अंदाज़ पर पुरज़ोर हंस देना तेरामानो न मानो मुहब्बत हो गयी है तुम तुम न रहो रहूं मैं भी मैं नहींतवारीख बनने की वजह हो गयी है

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    मयस्सर (Mayassar)

    तुम हो, हूँ मैं भी यहींदरमियाँ दोनों के मगरकुछ भी अब बाकी नहींसच तो है और फ़िक्र भीतेरे अफसानों में अबमेरा ज़िक्र क्यों नहीं तुम संवरते  थे जिसमेआईना था मैं कभीबहार थे तुम जिसकीवो गुलसितां था मैं हीहै दिल-ए-आरज़ू मगरदिल-ए-बेसब्र क्यों नहीं तुम्हें माँगा था खुदा सेहमने दुआओं की तरहआये थे तुम करीबमांगी मुरादों की तरहदिल-ए-अनजान मगरधड़कता अब क्यों नहीं आईना अब तोड़ दियाबहारों ने मुह मोड़ लियाएक बस तुम क्या गएकिस्मत ने दामन छोड़ दियाबाकी है बस याद मगरमयस्सर तुम क्यों नहीं

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    चेहरे (Chehre)

    दुनिया यह छोटी सीछोटी सी दुनिया मेंहर तरफ नज़र आतेचेहरे ही चेहरे निकलो गर घर सेपढ़ने लगो चेहरेइंसां की फितरतबयां करते चेहरे मासूम चेहरेजवां हसते चेहरेबुढ़ापे से लाचारमुरझाए चेहरे हैं गोरे गोरेकुछ साँवले सेदिल को लुभाजातेचंद प्यारे चेहरे तारीफ में इनकीदो लब्ज़ कह दोशरमाते लजातेखिलखिलाते चेहरे सो जाए आँखेंख्वाबों मैं चेहरेजागी हों आंखेदिखते हैं चेहरे तारीफ में इनकीदो लब्ज़ जो कह दोशरमाकर लजाकरखिलखिलाते चेहरे परदे में रहकरहकीकत छुपाते हैंपल में बदल जातेहर पल पर चेहरे दिलों में तो नफरतपर बनाते हैं रिश्तेसीने में खंजरलगा जाते चेहरे दुनिया यह छोटी सीछोटी सी दुनिया मेंहर तरफ नज़र आतेचेहरे ही चेहरे

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    मजदूरी की मजबूरी (Majdoori Ki Majboori)

    मैले कुचले से कपड़ों मेंस्वेदग्रस्त हो यह प्राणीजीवन है संघर्ष सिखातारिक्शेवाला सीख पुरानी रुपये चंद कमाने कोघर बार छोड़ कर आया हैपरिवार पालने की खातिरपरिवार त्यागकर आया है मन बोझिल पर आँखों मेंउम्मीद हिलोरें लेती हैअगली सवारी तेरी हैदिल को दिलासे देती है सोया हो तो ‘चलना है’ ?आवाज़ लगा कर तो देखोवह तुरंत ही चल देगातत्परता उससे सीखो गीत बुदबुदाता है कोईकरता खुद से है बात कभीभाव छलक जाते हैं मन केछेड़ो गर कोई तार कभी बाबूजी क्या बतलाएंअपनी तो है मजबूरीबेटवा को खूब पढ़ाएंगेनहीं करवाएंगे बेगारी घरवाली बीमार पता नहींबुरी खबर कब आ जाएउसकी इच्छा इतनी बसबिटिया ससुराल…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    फैन मिला न कोय (Fan Mila Na Koy)

    कविता लिख लिख कवि मरा फैन मिला न कोयगंजेन  की  बस्ती  कवि कंघी बेचै कोय पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ पंडित भया न कोयटी वी शो में नाच लेओ बल्ले बल्ले होय सूट गए साड़ी गयी चोटी दई कटायकन्हईपुर की बहनजी अब मैडम कहलाय सिस्टम को माने नहीं टीवी पर गुर्रायगाँधी को गाली बके झट नेता बन जाय प्रेमी सुसाइड कर लिया घर घर शोक मनायकिसान कर्ज में मर रहा कोई न देखन जाय जवान बॉर्डर पर मरे तो शहीद कहलायजीवित जो घर लौटता सब को बोझ सुझाय पुत्तर जी सर्विस करे बहू काम पे जायसास ससुर घर में पड़े…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    हक़ हमारा (Haq Hamaara)

    यह ज़मीं भी न थी न था आसमान येन दरिया समंदर खूबसूरत जहाँ येन इंन्सां की हस्ती न जंगल जिनावरबला खूबसूरत नज़ारे कहाँ ये न था कुछ हमारा न था कुछ तुम्हारान हक़ था हमारा न हक़ था तुम्हारा फिर उस खुदा ने जहाँ यह बसायाकायनात सारी फिर इंसां रचायामगर इंसां से इंसां छोटा बड़ा क्योंखुदा ने जब सबको बराबर बनाया खुदा से मिला है हमें हक़ हमाराअगर हक़ है तुमको तो है हक़ हमारा तुम्हारी अमीरी हो तुमको मुबारकबनो मत मगर तुम आका हमारेजाओगे जब छोड़कर जहाँ येखुले होंगे तब हाथ दोनों तुम्हारे दे दो न छीनो हमें हक़…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    कर्मण्येवाधिकारस्ते (Karmanyevadhikariste)

    क्या उलझन है मायूसी क्योंजो होगा हो जाने दो बेचैनी क्यों कल की चिंता में पड़ कर तुमक्यों हो अपना आज गंवातेक्यों न कड़े परिश्रम से तुमसुख साधन की फसल उगाते भाग्य का लेखा पता नहीं हैकर्म की कुंजी हाथ थमी हैश्रम से अपने धो डालो तुमकिस्मत पर जो धूल जमी है जो करना है आज ही कर लोआज गया तो कल की खबर क्याइक पल के मेहमान सभी हमयह पल गुजरा पल की खबर क्या छोडो उलझन मायूसी कोजो करना है अब कर लोइस पल में जी लो

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    शुभकामना (Shubhkaamna)

    लम्बा यह दौर था जीवन की राह मेंउड़ चलेगा कल तू नयी मंज़िल की चाह मेंसाथी यहां जो बने यहीं छूट जाएंगेमीत नए कुछ और तुझे मिल ही जाएंगे नए स्वपन में मग्न हो न भूल जाना तूवादा था किसी से तेरा उसको निभाना तू तूने आंधियों में भी दिये जलाए हैंहुनर से अपने रस्ते के पर्बत डिगाए हैंहाथों के छालों की कहाँ तूने परवाह कीमुस्कुराती सूरतों पर दिखती तेरी नेकी आगे भी मुफलिसों के सपने सजाना तूवादा था किसी से तेरा उसको निभाना तू सूरज के जैसा तेज़ है तेरे ललाट परगूंजती तेरी कीर्ति हर घर-ओ-घाट परनेताजी सैम जोश…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    कौन ले गया (Kon Le gaya)

    कौन ले गया लिखने का हुनर मेरातसव्वुर का गहरा समंदर मेरा में नहीं कोई बदनाम शायरन खायी चोट उल्फत में दिल परदौर आया कि अल्फाज़ जुड़ते गएपरिंदे खुले आसमां में उड़ते गए कुछ अपनी कही कुछ जहान कीटोह मिलने लगी ऊंचे आसमान कीजा पहुंचा वहां जहाँ न पहुंचे थे रविन जाने कब मर गया अंदर कवि हाथ में कलम मगर बोल मेरे पास नहींदिल की गहराई में घुमड़ते ज़ज़्बात नहींजाने कब छोड़ गई मुझे प्रतिभा मेरीबेजान जिस्म है खो गयी कविता मेरी ज़माना मशरूफ है कहाँ फुर्सत हैइस दौर में जज्बात की न कीमत हैकद्र नहीं तो लिखने से क्या…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    मिलन (Milan)

    मतवाला दिल सोचता हैजिस पल होगा अपना मिलनतुम फैलाकर अपना दामनथाम लोगी दिल की धड़कन जब से होश सम्भाला हैतुमसे ही सपने सजाए हैंप्रेम मिलन की आस में हमकई सीढ़ी चढ़ कर आये हैं सुना हैं जब ठुकराते सबतुम थाम सहारा देती होअपने आँचल की छाँव सजादुःख सारे हर लेती हो तुमसे होगा जब मिलन प्रियेसांस मेरी थमती होगीदिल की धड़कन भी सीने मेंकतरा कतरा जमती होगी आओ लो आकर थाम मुझेदो ज़न्नत का आराम मुझेमेरा अस्तित्व मिटा दो अबबस दे दो अपना नाम मुझे आदि हो तुम अब अंत भी तुमशाश्वत हो अनन्त भी तुमजीते जी सांस हो जीवन…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    बुलाये मेरी कविता (Bulaye Meri Kavita)

    पल पल तुम्हें है बुलाये मेरी कवितादिल धड़काये लजाये मेरी कवितादेती राहत है यह सूने हर मन कोइत्र सी मन में समाये मेरी कविता एहसास में थी बचपन से मेरे मन मेंदेती थी दस्तक दिल के नगर मेंगीत बनकर जो कागज़ पर है उतरीता थैया नाच नचाये मेरी कविता बोल होठों पर पहले न आते थेलब लरजते थे पर रुक जाते थेघाव गहरे जो दिल में दबे थेफांस ग़मों की निकाले मेरी कविता कभी बस गया था कोई मीत मन मेंयाद बन बस रह गया है जेहन मेंनींद टूटी तो स्वप्न कांच टूट गएमायूस दिल को समझाए मेरी कविता हमदम…